हमारे बारे में

हमारे बारे में

सर्वव्‍यापी स्‍वच्‍छता के कवरेज के प्रयासों में तेजी लाने के लिए और स्‍वच्‍छता पर बल देने के लिए प्रधानमंत्री ने दिनांक 2 अक्‍टूबर, 2014 को स्‍वच्‍छ भारत मिशन की शुरूआत की थी। दो उप मिशन, स्‍वच्‍छ भारत मिशन (ग्रामीण) और स्‍वच्‍छ भारत मिशन (शहरी) के लिए मिशन समन्‍वयकर्त्‍ता पेयजल और स्‍वच्‍छता मंत्रालय के सचिव हैं। दोनों मिशनों का उद्देश्‍य महात्‍मा गांधी की 150वीं वर्षगाँठ को सही रूप में श्रद्धांजलि देते हुए वर्ष 2019 तक स्‍वच्‍छ भारत की प्राप्‍ति करना है। इससे ग्रामीण भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस और तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन की गतिविधियों के माध्‍यम से स्‍वच्‍छता के स्‍तरों में वृद्धि होगी और गांवों को खुले में शौचमुक्‍त (ओडीएफ), स्‍वच्‍छ तथा शुद्ध बनाया जाएगा।

विजन

स्‍वच्‍छ भारत मिशन (ग्रामीण) का उद्देश्‍य दिनांक 02 अक्‍टूबर, 2019 तक स्‍वच्‍छ एवं खुले में शौच मुक्‍त (ओडीएफ) भारत की प्राप्‍ति करना।

उद्देश्‍य

  • स्‍वच्‍छता, साफ-सफाई तथा खुले में शौच के उन्‍मूलन को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की सामान्‍य गुणवत्‍ता में सुधार लाना है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍वच्‍छता के कवरेज को बढ़ावा देकर दिनांक 02 अक्‍टूबर, 2019 तक स्वच्छ भारत के सपने को साकार करना।
  • जागरूकता लाकर और स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा के माध्‍यम से स्‍थायी स्‍वच्‍छता प्रक्रियाएँ और सुविधाएँ अपनाने के लिए समुदायों को प्रेरित करना।
  • पारिस्थितिकीय रूप से सुरक्षित और स्‍थायी स्वच्छता के लिए लागत प्रभावी और उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण स्वच्छता लाने के लिए वैज्ञानिक ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन पर बल देते हुए समुदायिक प्रबंधित स्वच्छता प्रणालियों का आवश्‍यकतानुसार विकास करना।
  • जेंडर पर महत्‍वपूर्ण सकारात्‍मक प्रभाव ड़ालना और विशेषकर सीमांत समुदायों में स्‍वच्‍छता का सुधार करके उन्‍हें समाज से जोड़ने को बढ़ावा देना।

कार्यनीति

कार्यनीति पर बल देने का तात्‍पर्य राज्‍य सरकारों को स्‍वच्‍छ भारत के कार्यान्‍वयन में लचीलापन प्रदान करना है। चूँकि स्‍वच्‍छता राज्‍य का विषय है इसलिए राज्‍य की विशिष्‍ट आवश्‍यकताओं को ध्‍यान में रखते हुए स्‍वच्‍छ भारत मिशन की कार्यान्‍वयन नीति तथा तंत्रों और निधियों के उपयोग पर निर्णय लेना आवश्‍यक है। इसमें देश के लिए इसकी आवश्‍यकताओं को समझते हुए मिशन को पूरा करने के लिए संकेन्‍द्रित कार्यक्रम के जरिए राज्‍य सरकारों के प्रयासों को पूरा करने में भारत सरकार की अहम भूमिका है।

कार्यनीति के मुख्‍य तत्‍व निम्‍नलिखित हैं

  • जमीनी स्‍तर पर गहन व्‍यवहारगत परिवर्तन गतिविधियां चलाने के लिए जिलों की संस्‍थागत क्षमता को बढ़ाना।
  • कार्यक्रम को समयबद्ध तरीके से चलाने और परिणामों को सामूहिक रूप से मापने के लिए कार्यान्‍वयन एजेंसियों की क्षमताओं को सुदृढ़ करना।
  • समुदायों में व्‍यवहारगत परिवर्तन गतिविधियों के कार्यान्‍वयन हेतु राज्‍य स्‍तर की संस्‍थाओं के कार्यनिष्‍पादन को प्रोत्‍साहन देना।

व्‍यवहारगत परिवर्तन पर बल

  • स्‍वच्‍छ भारत मिशन को मुख्‍य रूप से भिन्‍न करने वाला कारक व्‍यवहारगत परिवर्तन है और इसलिए व्‍यवहारगत परिवर्तन संवाद (बीसीसी) पर अत्‍यधिक बल दिया जा रहा है।
  • बीसीसी, एसबीएम (जी) के घटक के रूप में की जाने वाली एक ‘स्‍टैण्‍डअलोन’ पृथक गतिविधि नहीं है बल्‍कि प्रभावी बीसीसी के माध्‍यम से समुदायों को सुरक्षित और स्‍थायी स्‍वच्‍छता प्रथाओं को अपनाने के लिए परोक्ष रूप से दबाव डालने के विषय में है।
  • जागरूकता सृजन, लोगों की मानसिकता को प्रेरित कर समुदाय में व्‍यवहारगत परिवर्तन लाने और घरों, स्‍कूलों, आंगनवाड़ियों, सामुदायिक समूहों के स्‍थलों में स्‍वच्‍छता की सुविधाओं की मांग सृजित करने तथा और ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन गतिविधियों पर बल दिया जा रहा है। चूँकि सभी परिवारों और व्‍यक्‍तियों द्वारा प्रतिदिन एवं प्रत्‍येक बार शौचालय के उपयोग पर वांछित व्‍यवहार अपनाए बिना खुले में शौच मुक्‍त गांवों की प्राप्‍ति नहीं की जा सकती है अत: सामुदायिक कार्रवाई और आउटलाइअरों पर दबाव पैदा करना जरूरी है।
व्‍यवहारगत परिवर्तन पर बल

स्‍वच्‍छ भारत के जमीनी सैनिक

स्‍वच्‍छाग्राही : ग्राम पंचायत स्‍तर पर समर्पित, प्रशिक्षित और उचित रूप से प्रोत्‍साहन प्राप्‍त स्‍वच्‍छता कार्य बल की आवश्‍यकता है। ‘जमीनी सैनिकों’अथवा ‘स्‍वच्‍छाग्राहियों’ जिन्‍हें पहले ‘स्‍वच्‍छता दूत’ कहा जाता था, की एक सेना तैयार की गई है और उन्‍हें वर्तमान व्‍यवस्‍थाओं जैसे पंचायती राज संस्‍थाओं, कॉपरेटिव्‍स, आशा, आंगनवाड़ी कार्यकताओं, महिला समूहों, समुदाय आधारित संगठनों, स्‍वयं सहायता समूहों, वॉटर लाइनमैन/पंप ऑपरेटरों के आदि के माध्‍यम से नियोजित किया गया है जो पहले से ग्राम पंचायतों में कार्य कर रहे थे अथवा विशेष रूप से इस प्रयोजनार्थ स्‍वच्‍छाग्राहियों के रूप में नियोजित किए गए थे। यदि संबद्ध विभागों में वर्तमान कार्मिकों का उपयोग किया जाता है तो उनके मूल संबद्ध विभाग, स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत गतिविधियों को शामिल करने के लिए इनकी भूमिकाओं के विस्‍तार की स्‍पष्‍ट व्‍यवस्‍था करें।

स्‍वच्‍छ भारत के जमीनी सैनिक

स्वच्छता प्रौद्योगिकियां

परिवार और समुदाय दोनों स्तरों पर स्वामित्व और स्थायी उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए शौचालयों की संस्थापना में वित्तीय अथवा अन्य रूप से लाभार्थी/समुदायों की पर्याप्त भागीदारी की सलाह दी गई है। बहुत से विकल्पों की सूची में निर्माण संबंधी दी गई छूट यह है कि गरीबों और लाभ न प्राप्त करने वाले परिवारों को उनकी आवश्यकताओं और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करते हुए उन्हें अपने शौचालयों की स्थिति को निरन्तर रूप से बेहतर बनाने के लिए अवसर दिए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि स्वच्छ शौचालयों का निर्माण किया जाए जिसमें सुरक्षित कंफाइनमेंट मल का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित हो। उपयोगकर्त्ता की पसन्द और स्थान-विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी विकल्पों तथा उन पर लगने वाली लागत की विस्तृत सूची उपलब्ध कराई गई है। जैसे-जैसे नई प्रौद्योगिकियां सामने आती हैं इस सूची को निरन्तर अद्यतन किया जाता है और प्रौद्योगिकियों से जुड़े विकल्प उपलब्ध कराते हुए लाभार्थियों को सूचित किया जाता है।

स्वच्छता प्रौद्योगिकियां

राज्यों को छूट

वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय के प्रोत्साहन के उपयोग के संबंध में राज्यों को छूट प्राप्त है। गहन प्रेरणादायी और व्यवहारगत परिवर्तन कार्य-कलापों (आईईसी घटक में से) के अलावा, ग्रामीण परिवारों के लिए वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों हेतु प्रोत्साहनों का प्रावधान राज्यों (आईएचएचएल घटक से) के पास उपलब्ध है। इसे, कवरेज को और अधिक बढ़ाने के लिए भी उपयोग में लाया जाता था ताकि समुदायिक परिणामों को प्राप्त किया जा सके।

मॉनीटरिंग पद्धति

गांवों की खुले में शौच मुक्त स्थिति, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं का कार्यान्वयन, तथा पारिवारिक शौचालयों, स्कूल और आंगनवाड़ी शौचालयों और समुदाय स्वच्छता परिसरों के निर्माण और उपयोग की निगरानी करने के लिए एक सुदृढ़ निगरानी व्यवस्था की गई है। इस निगरानी पद्धति में सामाजिक ऑडिट जैसी एक सुदृढ़ समुदाय चालित प्रणाली का भी उपयोग किया जाता है। समुदाय आधारित मॉनीटरिंग और सतर्कता समितियाँ, लोगों में दबाव पैदा करने में सहायक होती हैं। राज्य, समुदाय की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनाए जाने वाले डिलीवरी पद्यति के बारे में निर्णय लेते हैं।

ओडीएफ समुदायों का सत्यापन

‘ओडीएफ’ को भारत सरकार द्वारा परिभाषित किया गया है और इसके लिए संकेतक बनाए गए हैं। इन संकेतकों के अनुरूप गांवों का सत्यापन करने के लिए विश्वसनीय प्रक्रिया लाने के लिए एक प्रभावशाली सत्यापन पद्यति बहुत आवश्यक है। चूंकि स्वच्छता राज्य का विषय है और राज्य ही कार्यक्रम के कार्यान्वयन में मुख्य निकाय हैं, अतः ओडीएफ सत्यापन के लिए राज्य स्वयं एक बेहतर पद्धति तैयार कर सकते हैं। केन्द्र की भूमिका, विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं को आपस में साझा करना है और राज्यों द्वारा ओडीएफ घोषित ग्राम पंचायतों/गांवों के एक छोटे प्रतिशत का मूल्यांकन करने के लिए पद्यति विकसित करना है और फिर आगे केन्द्र/राज्य के अवमूल्यन में भारी अंतर होने पर राज्यों को सहायता देना और मार्गदर्शन करना है।

ओडीएफ समुदायों में स्थायित्व लाना

ओडीएफ की स्थिति प्राप्त करने में काफी हद तक व्यवहारगत परिवर्तन पर कार्य करना शामिल है, इसे बनाए रखने के लिए समुदाय द्वारा समन्वित प्रयास किए जाने की जरूरत है। बहुत से जिले और राज्यों ने ओडीएफ की निरन्तरता को बनाए रखने के लिए पैरामीटर विकसित किए हैं।

स्वच्छता : सब का कार्य

एमडीडब्‍ल्‍यूएस जिसे एसबीएम -ग्रामीण का प्रभार आबंटित किया गया है, इसके अलावा स्वच्छ भारत की प्राप्ति के लिए यह सभी गतिविधियों और पहलों के लिए नोडल मंत्रालय भी है। इस जिम्मेदारी को पूरा करने में यह मंत्रालय भारत सरकार के सभी अन्य  मंत्रालयों, राज्य सरकारों, स्थानीय संस्थानों, गैर सरकारी और अर्ध सरकारी एजेंसियों, कॉरपोरेटों, एनजीओ, धार्मिक संगठनों, मीडिया तथा शेष हिस्सेदारों के साथ मिलकर निरंतर कार्य कर रहा है। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री के आह्वाहन पर आधारित है जिसमें स्वच्छता, मात्र स्वच्छता विभाग का कार्य न रहकर सभी का कार्य है। इस प्रक्रिया में कई विशेष पहलें और परियोजनाएं तेजी से सामने आई हैं। उन संगठनों की स्वच्छता में भागीदारी ,जिनका मुख्य कार्य स्वच्छता नहीं है, से स्वच्छ भारत के इस आह्वान को अत्यधिक प्रेरणा मिली है।

इन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को दो प्रमुख श्रेणियों में बांटा जा सकता है

अंतर मंत्रालयी समन्वय (आईएमसी)

  • नमामि गंगे
  • स्वच्छ कार्ययोजना (एसएपी)
  • स्वच्छता पखवाडा (एसपी)
  • स्वच्छ स्वस्थ सर्वत्र (एसएसएस)
  • स्कूली स्वच्छता
  • आंगनवाड़ी स्वच्छता
  • रेलवे स्वच्छता
  • पेट्रोल पंपों पर स्वच्छता
  • राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र

अंतर क्षेत्रीय समन्वय

  • स्वच्छ आइकोनिक स्थान (एसआईपी)
  • कॉरपोरेट भागीदारी
  • स्वच्छ भारत कोष
  • इंटर-फेथ कॉपरेशन
  • मीडिया भागीदारी
  • संसदीय भागीदारी
  • सार्वजनिक नीति अनुसंधानकर्ताओं के साथ भागीदारी
  • एनजीओ संबंध

नमामि गंगे

  • नमामि गंगे कार्यक्रम जल संसाधन मंत्रालय (एमओडब्ल्यूआर) की एक पहल है जिसमें गंगा तट पर स्थित गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाना तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन से जुड़ी कार्रवाईयों को पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • इस पहल पर बल देने के लिए दिनांक 20 अगस्त 2016 को इलाहाबाद में ग्राम पंचायतों का सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में पांच राज्यों से लगभग 2000 ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जिसमें केंद्रीय मंत्री, श्री नरेंद्र सिंह तोमर और जल संसाधन के केंद्रीय मंत्री, सुश्री उमा भारती  भी उपस्थित थीं।
  • तब से राज्य सरकारों की सक्रिय सहायता से पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा  उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश ,बिहार, झारखंड और पश्चिमी बंगाल के कुल 52 गंगा किनारे बसे जिलों के  सभी गांवों को ओडीएफ बनाया जा चुका है।
  • इन गांवों में ओडीएफ स्थिति की गुणवत्ता की जाँच की जा रही है और संभावना है कि यह शीघ्र ही पूरी हो जाएगी।
नमामि गंगे

स्वच्छता कार्य योजना (एसएपी)

  • एसएपी, स्वच्छता के लिए इस प्रकार का पहला अंतर-मंत्रालयी कार्यक्रम है, जो प्रधानमंत्री के दूरदृष्टि कि स्वच्छता सभी का कार्य हो, को वास्तविकता में  पूरा करेगा।
  • सभी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों ने अपने उपयुक्त बजटीय प्रावधान के साथ महत्वपूर्ण रूप से इसे साकार करने के कार्यों को शुरू कर दिया है. वित्त मंत्रालय द्वारा इसके लिए एक अलग बजट शीर्ष तैयार किया गया है.
  • वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान 77 मंत्रालयों/विभागों ने अपने एसएपी के लिए 12468.62 करोड़ रुपए की निधियों की प्रतिबद्धता की है।
  • एसएपी का कार्यान्वयन दिनांक 1 अप्रैल 2017 को शुरू हुआ था और प्रत्येक तिमाही में इसकी समीक्षा की जाती है
  • एसएपी के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक वेब आधारित पोर्टल www.swachhtaactionplan.com External website that opens in a new window की शुरुआत की गई है। इसमें सभी मंत्रालयों/विभागों द्वारा एसएपी के कार्यान्वयन को दर्शाया जाएगा।

स्वच्छता पखवाड़ा

  • स्वच्छता पखवाडा अप्रैल 2016 में शुरू किया गया था जिसका उद्देश्य भारत सरकार के मंत्रालयों/ विभागों के  कार्यक्षेत्र में स्वच्छता के मुद्दों और प्रथाओं पर गहनता से बल देने के लिए पखवाड़े का आयोजन करना है।
  • पखवाडा गतिविधियों के लिए मंत्रालयों की आयोजना में सहायता हेतु एक वार्षिक कलेंडर पहले से ही मंत्रालयों के मध्य परिचालित किया गया है।
  • स्वच्छता पखवाडा मना रहे मंत्रालयों की स्वच्छता समीक्षा की ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली का उपयोग करके नजदीकी से मॉनिटरिंग की जाती है जिसपर वे स्वच्छता गतिविधियों से संबंधित कार्य योजनाएं, चित्र, वीडियो अपलोड और साझा करते हैं।
  • स्वच्छता पखवाड़ा मनाने के बाद, मंत्रालय/विभाग प्रेस कॉन्फ्रेंस तथा अन्य संवाद तरीकों के माध्यम से अपनी अपनी उपलब्धियों की घोषणा करते हैं
  • पखवाडा के दौरान पखवाडा मना रहे मंत्रालयों को स्वच्छता मंत्रालय के रूप में समझा जाता है और उनके कार्यक्षेत्र में गुणात्मक स्वच्छता सुधारों की अपेक्षा की जाती है।
स्वच्छता पखवाड़ा

स्‍वच्‍छता पखवाड़ा कैलेण्‍डर - 2017

क्र.सं. पखवाड़ा मंत्रालय
1 1-15 जनवरी 1) विदेश मंत्रालय
2) वित्त मंत्री
3) इस्पात मंत्रालय
2 16-31 जनवरी 1) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
2) नागर विमानन मंत्रालय
3 1-15 फरवरी 1) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
2) आयुष मंत्रालय
4 16-28 फरवरी 1) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
2) पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय
5 1-15 मार्च 1) महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय
2) जनजातीय मामले मंत्रालय
6 16-31 मार्च 1) जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय
2) पोत परिवहन मंत्रालय
7 1-15 अप्रैल 1) विधि और न्याय मंत्रालय
2) संसदीय कार्य मंत्रालय
3) परमाणु ऊर्जा विभाग
8 16-30 अप्रैल 1) संस्कृति मंत्रालय
2) पर्यटन मंत्रालय
9 1-15 मई 1) श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
2) वस्‍त्र मंत्रालय
10 16-31 मई 1) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
2) उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
11 1-15 जून 1) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
2) नवीन एवं नवीकरणीय मंत्रालय
3) कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय
4) परमाणु ऊर्जा विभाग
12 16-31 जून 1) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
2) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
3) अंतरिक्ष विभाग
13 1-15 जूलाई 1) संचार मंत्रालय
2) विद्युत मंत्रालय
14 16 से 31 अक्टूबर 1) खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
2) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
15 1 से 15 नवम्बर 1) कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय
2) विज्ञान और प्रौद्यिकी मंत्रालय
16 16 से 30 नवम्बर 1) आवासन और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय
2) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय
17 1 से 15 दिसम्बर 1) रक्षा मंत्रालय
2) गृह मंत्रालय
3) सूक्ष्‍म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय
18 16 से 31 दिसम्बर 1) कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
2) भारी उद्योग और लोक उपक्रम मंत्रालय
3) खान मंत्रालय

स्वच्छ स्वस्थ सर्वत्र (एसएसएस)

  • पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) के बीच संयुक्त पहल।
  • उद्देश्य : स्वच्छ भारत मिशन और कायाकल्प (एमओएचएफडब्ल्यू), दो पूरक कार्यक्रमों को बनाना और उनकी उपलब्धियों में वृद्धि करना।
  • इस पहल में शामिल है- चुनिंदा अस्पतालों में वाश पैमानों पर ध्यान केन्द्रित करना, पहचाने गए स्वास्थ्य केन्द्रों के आस-पास क्षेत्रों में खुले में शौच से मुक्त करने के कार्यों को प्राथमिकता देना और चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए स्वच्छता संबंधी उन्नत प्रशिक्षण।
  • एमओएचएफडब्ल्यू ने 532 कायाकल्प पुरस्कार पाने वाले जन स्वास्थ्य केन्द्रों (पीएचसी) की पहचान की है और इसकी सूची पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के साथ साझा की है।
  • पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने ओडीएफ के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए उन ग्राम पंचायतों का मानचित्रण किया है, जहां ये पीएचसी स्थित हैं।
  • पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने वाश पैमानों पर कायाकल्प पुरस्कार पाने वाले सीएचसी/पीएचसी के 700 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया है, इस प्रशिक्षण का संचालन यूनीसेफ द्वारा किया जाएगा।

पेट्रोल पंपों पर स्वच्छता

  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में swachhta@PetrolPump नामक एक मोबाइल ऐप तैयार किया है।
  • इस ऐप से शौचालयों की निगरानी और उनकी साफ-सफाई के रख-रखाव में सहायता मिलेगी और इसे सभी ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।
  • पेट्रोल पंपों के पास शौचालय के निर्माण का प्रावधान।
पेट्रोल पंपों पर स्वच्छता

राष्ट्रीय स्वच्छता केन्द्र (आरएसके)

  • इसकी उद्घोषणा चंपारण सत्याग्रह के 100 वर्षों के पूरे होने की आयोजना के दौरान दिनांक 10 अप्रैल, 2017 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी।
  • इसे राजघाट पर बापू की समाधि के सामने निर्मित किया जाना है. आरएसके के माध्यम से स्वच्छता से संबंधित सभी सूचनाएं तथा लोगों के बीच शौचालय की नवीनतम प्रौद्योगिकी प्रसारित करने की योजना है। यह इसके साथ-साथ देश भर में एसबीएम के लिए हो रहे प्रयासों को भी दर्शाएगा, साथ ही भारत में स्वच्छता के इतिहास, अंतर मंत्रालयी समन्वय पहलों, परस्पर वार्ता कार्यक्रम और एक स्वच्छता ज्ञान केन्द्र को भी दर्शाएगा।

स्वच्छ ऑयकानिक स्थल (एसआईपी)

  • माननीय प्रधानमंत्री की प्रेरणा से मंत्रालय ने भारत भर में उन 100 स्थानों की सफाई करने पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए मल्टी-स्टेकहोल्डर पहल की है जो अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और/अथवा सांस्कृतिक महत्ता के कारण ‘ऑयकानिक’ हैं।
  • इस पहल का उद्देश्य इन स्थानों की स्वच्छता स्थितियों को उल्लेखनीय रूप से उच्च स्तर पर लाकर इनमें सुधार करना है।
  • यह पहल, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय जो कि इसका नोडल मंत्रालय है, के साथ शहरी विकास मंत्रालय, पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय की भागीदारी से है।
  • सभी ऑयकनिक स्थल पर वित्तीय और तकनीकी सहायता के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को नियुक्त किया गया है।
स्वच्छ ऑयकानिक स्थल (एसआईपी)

10 आकॉनिक स्‍थल जिन्हें प्रथम चरण में लिया गया है, वे हैं :

  • अजमेर शरीफ दरगाह, अजमेर, राजस्थान
  • सीएसटी, मुम्‍बई, महाराष्ट्र
  • स्वर्ण मंदिर, अमृतसर, पंजाब
  • कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी, असम
  • मणिकर्निका घाट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • मीनाक्षी मंदिर, मदुरै, तमिलनाडु
  • श्री माता वैष्णो देवी, कटरा, जम्‍मू एवं कश्‍मीर
  • श्री जगन्‍नाथ मंदिर, पुरी, ओडिशा
  • ताज महल, आगरा, उत्‍तर प्रदेश
  • तिरुमला तिरुपति देवस्थानम, तिरुपति, आंध्र प्रदेश

10 आकॉनिक स्‍थल जिन्हें प्रथम चरण में लिया गया है, वे हैं

एसआईपी स्थलों के लिए पीएसयू प्रायोजक – चरण 1

क्र.सं. ऑयकानिक स्थल प्रायोजक
1 अजमेर शरीफ दरगाह, अजमेर, राजस्थान हिन्‍दुस्‍तान जिंक इंडिया लि‍., वेदांता ग्रुप
2 छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी), मुम्‍बई, महाराष्ट्र भारतीय स्‍टेट बैंक (एसबीआई)
3 स्वर्ण मंदिर, अमृतसर, पंजाब हिन्दुस्‍तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल)
4 कामाख्या देवी श्रीरिन, गुवाहाटी, असम ऑयल इंडिया
5 मर्णिकर्निका घाट, उत्तर प्रदेश नॉर्दन कोल फील्ड लिमिटेड
6 मीनाक्षी मंदिर, मदुरै, तमिलनाडु भारत पेट्रोलि‍यम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल)
7 श्री माता वैष्णो देवी, कटरा, जम्मू एवं कश्मीर हिन्दुस्‍तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल)
8 श्री जगन्‍नाथ मंदिर, पुरी, ओडिशा नैशनल ऐलुमिनियम कंपनी लिमिटेड (एनएएलसीओ)
9 ताज महल, आगरा, उत्तर प्रदेश गैस ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड
10 तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम, तिरुपति, आंध्र प्रदेश ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन एंड नेयवेली लिगनाइट कॉर्पोरेशन इंडिया लीमिटेड

एसआईपी स्थलों के लिए पीएसयू प्रायोजक – चरण 2

क्र.सं. ऑयकानिक स्थल प्रायोजक
1 गंगोत्री, उत्तराखंड -
2 यमुनोत्री, उत्तराखंड -
3 महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन -
4 चारमिनार, हैदराबाद -
5 सेंट फ्रांसिस असिसि का चर्च और कॉन्वेंट, गोवा -
6 आदी शंकराचार्य का घर कलादी, एर्नाकुलम, केरल -
7 गोमातेश्वर मंदिर, श्रावणबेलगोला, कर्नाटक -
8 बैजनाथ धाम, देवगढ़, झारखंड -
9 गया तीर्थ, बिहार -
10 सोमनाथ मंदिर, गुजरात -

स्वच्छ भारत कोष (एसबीके)

  • पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय स्वच्छ भारत कोष के लिए सक्रिय रूप से निधियां जुटा रहा है। यह कार्य अक्टूबर, 2014 से शुरू हुआ था और इसमें व्यक्तिगत अंशदान के साथ-साथ कॉरपोरेटों को भी शामिल किया गया है।
  • मंत्रालय ने कॉरपोरेट क्षेत्रों के साथ दो विस्तृत बैठकें आयोजित की हैं और बहुत-सी बैठकों में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के साथ कई अन्य वार्ताओं में भाग लिया है, जिसके बाद कोष में अंशदान बढ़ गया है।
  • स्वच्छ भारत कोष में किया जाने वाला कुल अंशदान वर्ष-वार इस प्रकार है 159.6 करोड़ रुपए (2014-15), 253.24 करोड़ रुपए (2015-16), 245.04 करोड़ रुपए (2016-17) और 3.78 करोड़ रुपए (वर्ष 2017-18 में जुलाई 2013 तक)। स्वच्छ भारत कोष से अब तक लगभग 332.64 करोड़ रुपए की निधियां विभिन्न राज्यों को जारी की गई हैं।

इंटर-फेथ-कॉपरेशन

  • स्‍वच्‍छ भारत मिशन के लक्ष्‍य को आगे ले जाने के लिए मंत्रालय जीआईडब्‍ल्‍यूए और अन्‍य धार्मिक संगठनों के साथ कार्य कर रहा है।
  • यह कार्य गंगा तट पर स्‍थित गांवों सहित कई क्षेत्रों में किया जा रहा है।
  • उत्‍तराखंड में गंगा नदी के तट पर स्‍थित गांवों ‘गंगा ग्रामों’ के सहयोग हेतु धार्मिक संगठन भी आगे आ रहे हैं।
इंटर-फेथ-कॉपरेशन
Back to Top