सामान्य प्रश्न

पूर्व में चलाए जा रहे निर्मल भारत अभियान (एनबीए) में संशोधन करते हुए दिनांक 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरूआत की गई, यह एक समुदाय-चालित तथा जन-उन्मुखी कार्यक्रम हैं जिसका उद्देश्य सर्वव्यापी सुरक्षित स्वच्छता से है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित केवल स्वच्छता कार्यक्रम है।

सरकार ने भारत में वर्ष 2019 तक हर जगह स्वच्छता लाने, स्वच्छता की स्थिति में सुधार करने और देश में खुले में शौच करने की प्रथा को समाप्त करने के प्रयासों में वृद्धि लाने के लिए 02 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) शुरू किया। यह कार्यक्रम देश में स्वच्छता और साफ-सफाई में सुधार लाने का सबसे बड़ा अभियान माना जाता है। इस कार्यक्रम की सफलता शौचालयों की मांग सृजित करने पर निर्भर करती है, जिसके परिणामस्वररूप उनका निर्माण और सभी पारिवारिक सदस्यों द्वारा उनका स्थायी रूप से उपयोग संभव हो सके। इसका लक्ष्य आबादी के मध्य बेहतर वैयक्तिक साफ-सफाई के व्यवहार को बढ़ावा देना और देश के गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्यूएम) परियोजनाओं को शुरू करके सफाई में सुधार लाना भी है। इस कार्यक्रम में प्रशिक्षित कार्मिकों की सेवाएँ लेकर, वित्तीय प्रोत्साहन देकर और आयोजना एवं मॉनीटरिंग के लिए सिस्टम और प्रक्रियाएँ बनाकर सहयोग देकर बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत व्यवहारगत परिवर्तन के कार्यों पर जोर देना है, जिसमें अंतरवैयक्तिक संप्रेषण, कार्यान्वयन और सेवा प्रणाली को ग्राम पंचायत स्तर तक सशक्त बनाना और राज्यों को उनकी स्थानीय संस्कृतियों, प्रथाओं, संवेदनाओं और मांगों के आधार पर सुविधा तंत्र को डिजाइन करने में लचीलापन देना शामिल है।

  • निर्मल भारत अभियान (एनबीए) को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में पुनः निर्मित किया गया।
  • आईएचएचएल की इकाई लागत को 10,000/- रूपये से बढ़ाकर 12,000/- रु. किया गया, ताकि जल की उपलब्धता, भंडारण, हाथ-प्रक्षालन तथा शौचालयों की सफाई आदि के लिए जल उपलब्ध हो।
  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से आईएचएचएल के लिए केंद्रीय हिस्सा‍ 72,00/- (60%) होगा। राज्य का हिस्सा 4800/- रुपये (40%) होगा। पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर तथा विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों के लिए केन्द्रीय हिस्सा 10,800/- है तथा राज्य का हिस्सा 12,00/- रुपये है (90% : 10%)। अन्य स्रोतों से अतिरिक्त अंशदान स्वीकृत किया जाएगा।
  • कुल परियोजनागत लागत का 8% आईईसी के प्रावधान के लिए होगा जिसका 3% केन्द्रीय स्तर पर तथा 5% राज्य स्तर पर उपयोग किया जाएगा।
  • प्रशासनिक लागत के प्रावधान के लिए परियोजना लागत का 2% उपलब्ध होगा। केंद्र तथा राज्य के बीच हिस्सेदारी का ढांचा 60 : 40 का होगा।
  • वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों (आईएचएचएल) के निर्माण के लिए प्रोत्साहन के भुगतान के लिए मनरेगा से आंशिक वित्तपोषण बंद कर दिया गया है तथा भारत सरकार के हिस्से की संपूर्ण राशि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से दी जाती है।
  • एसएलडब्ल्यूएम का वित्तपोषण 60 : 40 के अंशदान के ढाँचे में होगा। सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (सीएससी) के अंशदान के लिए यह 60:30:10 होगा (केंद्र : राज्य : समुदाय)। सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण तभी होगा जब ग्राम पंचायत उसके स्वामित्व की जिम्मेदारी ले और सतत् प्रचालन एवं रखरखाव की प्रणाली सुनिश्चित करे।
  • सभी स्कूली शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को तथा आंगनवाड़ी शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्रालय को अंतरित की गई है।
  • निगरानी तंत्र को मजबूत बनाया जाएगा। परिणामों (निर्माण) तथा निष्कर्षों (उपयोग) की निगरानी की जाएगी।
  • स्व्च्छ भारत मिशन द्वारा शौचालयों तथा एसएलडब्यूएम की परियोजनाओं के लिए प्रामाणिक तकनीकी विकल्पों की सूची राज्यों को उपलब्ध कराई जाएगी। मिशन, न्यूनतम स्वीकृति योग्य तकनीकों की सूची उपलब्ध कराएगा जिनके लिए इस कार्यक्रम के अंतर्गत सहायता उपलब्ध होगी। तथापि लाभार्थी द्वारा अतिरिक्त लागत का वहन किए जाने पर ही उच्च प्रौद्योगिकी के उपयोग की स्वीकृति होगी।

एसबीएम (जी) के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की सामान्य गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए स्वच्छता, व्यक्तिगत साफ-सफाई तथा खुले में शौच को बन्द करने को प्रोत्साहन देना
  • आईएचएचएल की इकाई लागत को 10,000/- रूपये से बढ़ाकर 12,000/- रु. किया गया, ताकि जल की उपलब्धता, भंडारण, हाथ-प्रक्षालन तथा शौचालयों की सफाई आदि के लिए जल उपलब्ध हो।
  • स्वच्छ भारत की संकल्पना को दिनांक 2 अक्टूबर 2019 तक प्राप्त करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के कवरेज को बढ़ाना।
  • जागरूकता पैदा करके तथा स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा के माध्यम से समुदायों तथा पंचायती राज संस्थाओं को सतत् स्वच्छता बनाए रखने तथा सुविधाओं के प्रयोग के लिए प्रेरित करना।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा तथा निरंतर स्वच्छता के लिए प्रभावपूर्ण लागत तथा उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
  • समुदाय द्वारा प्रबंधित स्वच्छता प्रणालियों का विकास करना, जहाँ भी आवश्यक हो, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण स्वच्छता के लिए वैज्ञानिक ठोस एवं तरल अपशिष्ट, पदार्थ प्रबंधन पर बल दिया जाए।

मुख्य गतिविधियां हैं :

  • वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों (आईएचएचएल) का निर्माण।
  • सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (सीएससी) का निर्माण।
  • ठोस तथा अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्यूएम) की गतिविधियाँ।
  • सूचना, शिक्षा तथा संप्रेषण (आईईसी) तथा मानव संसाधन विकास (एचआरडी) की गतिविधियां।
What are the incentives for IHHL toilets?
क्रम संख्‍या घटक एसबीएम (जी) परियोजना परिव्‍यय के प्रतिशत के रूप में चिह्नित राशि अंशदान का ढांचा
(भारत सरकार)
अंशदान का ढांचा
(राज्‍य)
अंशदान का ढांचा
(लाभार्थी परिवार/ समुदाय)
1. वैयक्‍तिक पारिवारिक शौचालय पूर्ण कवरेज के लिए वास्‍तव में आवश्‍यक राशि 7200 रू. (60%) (पूर्वोत्‍त्‍ार राज्‍यों, जम्‍मू और कश्‍मीर तथा विशेष दर्जा प्राप्‍त राज्‍यों के लिए 10,800 रू. (90%)) 4800 रू. (40%) (पूर्वोत्‍तर राज्‍यों, जम्‍मू और कश्‍मीर तथा विशेष दर्जा प्राप्‍त राज्‍यों के लिए 1,200 रू. (10%))  
2. सामुदायिक स्‍वच्‍छता परिसर पूर्ण कवरेज के लिए वास्‍तव में आवश्‍यक राशि 60% 30% 10%
3. ठोस / तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन (मूल लागत) स्‍वीकृत सीमाओं के भीतर एसएलडब्‍ल्‍यूएम परियोजना लागत के अनुसार वास्तविक राशि 60% 40%  
4. आईईसी घटक आबंटन का 8% (राष्‍ट्रीय स्‍तर पर 3%; राज्‍य स्‍तर पर 5%) 60% 40%  
5. प्रशासनिक लागत राज्‍य आबंटन का 2% 60% 40%  

पूर्वोत्तर और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए विभाजन ढांचा 90:10 है।

खुले में शौच से मुक्‍त स्‍थिति को निम्‍न प्रकार से परिभाषित किया गया है

"ओडीएफ ‘मल-मौखिक’ संचारण का समापन है, जो निम्‍नानुसार परिभाषित होगा:

  • वातावरण/गांव में किसी प्रकार का मल दृष्‍टिगत न होना।
  • प्रत्‍येक परिवार और साथ ही सार्वजनिक/सामुदायिक संस्‍थानों द्वारा मल के निपटान हेतु सुरक्षित तकनीकी विकल्‍प का प्रयोग हो।

(सलाह : सुरक्षित तकनीकी विकल्‍प का अर्थ है सतही मिट्टी, भूजल अथवा सतही जल में किसी प्रकार का संदूषण न होना, मल का मक्‍खियों तथा जानवरों की पहुंच से दूर होना, दुर्गंध तथा भद्दी स्‍थिति से मुक्‍त होना।)’’

भारत सरकार और संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों की सहायता से राज्य/ संघ राज्य क्षेत्रों के जिलों में एसबीएम (जी) का कार्यान्वयन किया जा रहा है। जिला स्तर पर, जिला पंचायत, परियोजना का कार्यान्वयन करती है। यदि जिला पंचायत क्रियाशील न हो तो जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम) एसबीएम (जी) का कार्यान्वयन कर सकती है। इसी प्रकार से, ब्लॉक और पंचायत स्तरों पर, पंचायत समिति और संबंधित ग्राम पंचायतों को एसबीएम (जी) के कार्यान्वयन में शामिल किया गया है।

73वे संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1992 के अनुसार, स्वच्छता 11वीं सूची में शामिल है और पंचायतों की जिम्मेदारी है। जिला स्तर पर, परियोजना का कार्यान्वयन जिला पंचायत करती है। इसी प्रकार से, ब्लॉक तथा पंचायत स्तर पर पंचायत समिति और संबंधित ग्राम पंचायतें एसबीएम (जी) कार्यक्रम के कार्यान्वयन में शामिल हैं। ग्राम पंचायतें स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के कार्यान्वयन में वीओ/ एनजीओ के साथ मिलकर शौचालयों के निर्माण और सुरक्षित अपशिष्ट निपटान द्वारा स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए लोगों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। निर्मित सामान्य सुविधाओं के प्रचालन एवं रखरखाव की मुख्य जिम्मेदारी उनकी है। पंचायतें उत्पादन केंद्र/ ग्रामीण स्वच्छता बाजार खोल सकते हैं और उनका संचालन कर सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में एसबीएम (जी) के कार्यान्वयन में एनजीओ की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें आईईसी गतिविधियों और साथ ही साथ पीसी अथवा आरएसएम स्थापित करने में शामिल किया जा सकता है। उनकी सेवाओं की आवश्यकता न सिर्फ ग्रामीण स्वच्छता की आवश्यकता के लिए ग्रामीण लोगों के मध्य जागरूकता पैदा करने की है बल्कि स्वच्छ शौचालयों का उपयोग सुनिश्चित करने की भी है। एनजीओ, उत्पादन केंद्र और ग्रामीण स्वच्छता बाजार खोल सकते हैं और उसका संचालन कर सकते हैं। तथापि, केवल समर्पित और प्रेरित एनजीओ को एसबीएम (जी) कार्यान्वयन में शामिल करना चाहिए।

एसबीएम (जी), जिसे 02.10.2014 से कार्यान्‍वित किया जा रहा है, के अंतर्गत निम्‍नलिखित नई पहलें शुरू की गई हैं :

  • व्‍यवहारगत परिवर्तन पर जोर दिया गया है। राज्‍यों को समुदाय आधारित सामूहिक व्‍यवहारगत परिवर्तन को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। ऐसा इस कारण से किया गया है कि स्‍वच्‍छता मानसिकता का मुद्दा है और शौचालयों का उपयोग महत्‍वपूर्ण है।
  • समुदाय आधारित स्‍थानीय चैंपियन भारी संख्या में उभर कर सामने आ रहे हैं जो एसबीएम (जी) को एक नागरिक आंदोलन के रूप में बदल रहे हैं। इन चैंपियनों द्वारा निभाई गई भूमिकाओं को प्रदर्शित करने वाली सफलता की कुछ कहानियों को ‘ऐन ओपेन माइंड’ नामक पुस्‍तिका के रूप में प्रकाशित किया गया है।
  • राज्‍यों को कार्यान्‍वयन में लचीलापन दिया गया है, क्‍योंकि स्‍वच्‍छता राज्‍य का विषय है और सामाजिक आर्थिक-सांस्‍कृतिक दशाएँ हर राज्‍य में अलग होती हैं। कलेक्‍टरों का प्रशिक्षण 30-30 के बैच में शुरू किया गया है। देश भर से लगभग 470 कलेक्‍टरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस प्रशिक्षण द्वारा कलेक्‍टरों को सामुदायिक दृष्‍टिकोण और जगह-जगह की सफल कहानियों से परिचित कराया गया है।
  • अधिकारियों को उनके प्रवेश के स्‍तर पर ही इस कार्यक्रम की जानकारी उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से एलबीएसएनएए, मसूरी के लिए एक प्रशिक्षण माड्यूल बनाया गया है। इसके अंतर्गत भारतीय प्रशासनिक सेवा और अन्‍य ग्रुप ‘ए’ प्रोबेशनरों को एसबीएम(जी) के बेहतर कार्यान्‍वयन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समुदाय में व्‍यवहारगत परिवर्तन के लिए ‘ट्रिगरिंग’ भी इस प्रशिक्षण का हिस्‍सा है।
  • पब्लिक डोमेन/ऑन लाइन मॉनीटरिंग प्रणाली में उपलब्‍ध वैयक्‍तिक पारिवारिक शौचालय के लाभार्थियों के नाम और पतों को शामिल कर सभी डाटा तैयार करके एसबीएम(जी) के कार्यान्‍वयन हेतु ऑनलाइन मॉनीटरिंग को सुदृढ़ किया गया है और पारदर्शिता बढ़ाई गई है। दिनाँक 2 अक्टूबर, 2014 के बाद निर्मित शौचालयों के फोटो अपलोड करने के लिए एक मोबाइल एप्‍लीकेशन बनाया गया है।
  • स्‍वच्‍छता अभियान नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं। दिनाँक 25 सितम्‍बर, 2014 से 31 अक्‍टूबर, 2014 तक देश भर में राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छता अभियान आयोजित किया गया था। इसके बाद देश भर में 16 से 22 मार्च, 2015 तक जल एवं स्‍वच्‍छता जागरूकता सप्‍ताह मनाया गया। यह अभियान जुलाई और अगस्‍त, 2015 में चलाया गया एवं अभियान पुन: सितम्‍बर और अक्‍टूबर 2015 में चलाया गया।
  • विश्व हाथ धुलाई दिवस- 15 अक्‍टूबर, 2014 और 2015 को ‘विश्‍व हाथ धुलाई दिवस’ मनाया गया। मध्‍य प्रदेश राज्य ने 2014 में एक दिन में 3 लाख से अधिक बच्‍चों द्वारा हाथ धोने की गतिविधियाँ आयोजित करके विश्‍व रिकार्ड बनाया था।
  • राष्ट्रीय स्‍तर पर श्रव्‍य-दृश्‍य (टीवी) तथा श्रव्‍य (रेडियो) माध्‍यमों के प्रयोग द्वारा व्‍यापक मीडिया अभियान शुरू किया गया है। राज्‍य भी आईईसी अभियान चला रहे हैं।
  • सामाजिक मीडिया का उपयोग – भारत सरकार तथा सभी राज्‍यों के अधिकारियों को शामिल करके एक स्‍वच्‍छ भारत वाट्सऐप समूह बनाया गया है। इसी प्रकार का समूह प्रत्‍येक राज्‍य में भी बनाया गया है। एसबीएम(जी) का एक फेसबुक पेज भी बनाया गया है।
  • राज्‍यों को ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडबल्‍यूएम) दिशा-निर्देश परिचालित किए गए हैं। गाँवों में ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट गतिविधियाँ शुरू करने हेतु राज्‍यों को प्रेरित करने के लिए अनेक राष्‍ट्रीय एवं क्षेत्रीय कार्यशालाएँ आयोजित की गईं।
  • नवाचारों का प्रदर्शन (इंडोवेशन) आयोजित किया गया - नई दिल्‍ली में दिनांक 26-27 अगस्‍त 2014, 23-24 जनवरी, 2015 और 2-3 जुलाई, 2015 को तीन प्रदर्शनियाँ आयोजित की गईं, जिनमें शौचालय, ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन तथा जल शोधन से संबंधित विभिन्न अभिनव तकनीकों को विभिन्‍न हिस्‍सेदारों/उपयोगकर्ताओं को प्रदर्शित किया गया, जिनमें विभिन्‍न राज्‍य सरकारें, एनजीओ तथा अनुसंधान एवं शैक्षिक संस्‍थाएँ भी शामिल थीं।
  • अभिनव तकनीकों का परीक्षण करने के लिए डॉ. आर ए माशेलकर की अध्‍यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई। इस समिति ने विभिन्‍न अभिनव तकनीकों की सूची बनाई और इन तकनीकों का एक सार संग्रह बना कर प्रकाशित किया और विभिन्‍न हिस्‍सेदारों के लाभ हेतु इस संग्रह को मंत्रालय की वैबसाइट पर डाला गया है।
  • मंत्रालय की वैबसाइट पर एक लिंक सृजित किया गया है, जहाँ अन्‍वेषक, निर्माता और अन्‍य हिस्‍सेदार अपनी तकनीकों/विचारों/अन्‍वेषणों का प्रदर्शन कर सकते हैं।
  • राज्‍यों को उनकी स्‍वतंत्र रूप से प्रमाणित प्रगति और स्‍वच्‍छता की निरंतरता के आधार पर प्रोत्‍साहन देने के लिए 9000 करोड़ रूपये की विश्‍व बैंक परियोजना अनुमोदित की गई है।
  • खुले में शौचमुक्‍त (ओडीएफ) को परिभाषित किया गया है और खुले में शौच मुक्‍त सत्यापन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
  • 175 जिलों को एक वर्ष के अंदर ओडीएफ बनाने के लिए फेज-1 जिलों के रूप में इनकी पहचान की गई है।
  • ग्राम पंचायत स्‍तर तक स्‍वच्‍छता की स्‍थिति को देखने के लिए मोबाइल ऐप भी विकसित किया गया है।

ग्राम पंचायत स्‍तर के आंकड़ों सहित एसबीएम (जी) के लिए व्‍यापक वेब-आधारित ऑनलाइन मॉनीटरिंग प्रणालियां उपलब्‍ध है। जिला तथा राज्‍य स्‍तरों पर आंकड़े अद्यतन किए जाते हैं। आंकड़ों के प्रमाणीकरण के लिए लाभार्थियों के लिए नाम तथा कार्ड संख्‍या अपलोड करने की सुविधा के साथ प्रणाली को अद्यतन किया गया है। मंत्रालय के एसबीएम (जी), एमआईएस पर आधारभूत सर्वेक्षण से देश के सभी 18.17 करोड़ परिवारों के आंकड़ों को प्रविष्‍ट करके राज्‍यों के साथ सशक्‍त बनाया गया है। शौचालयों में स्‍वच्‍छता कवरेज की घरेलू स्‍तर पर कड़ी मॉनीटरिंग सुनिश्‍चित करने के लिए ऐसा किया गया है। परिवारों के नामों द्वारा कवरेज की मासिक प्रगति की मॉनीटरिंग भी की जाती है। दिनांक 2 अक्‍टूबर, 2014 के बाद निर्मित शौचालयों के चित्र अपलोड करने के लिए एक मोबाइल ऐप्‍लीकेशन भी शुरू किया गया है। चित्र जीयो-टैग्ड होते हैं। ग्राम पंचायत स्‍तर तक स्‍वच्‍छता स्‍थिति का पता लगाने के लिए मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है। चरण 1 जिलों के रूप में 175 जिलों की पहचान की गई है, उन्‍हें एक वर्ष के भीतर ओडिएफ बनाया जाएगा। इन जिलों को विशेष रूप से मॉनीटर किया जा रहा है। राष्‍ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संस्‍थान (एनएसएसओ) जैसी एजेंसियों द्वारा तीसरे पक्ष द्वारा मॉनीटरिंग भी की जा रही है। आईएमआईएस पर ओडीएफ की मॉनीटरिंग के लिए भी मॉड्यूल उपलब्‍ध है। इसके अतिरिक्‍त आईएमआईएस पर एक ऐसा मॉड्यूल भी है जिसके द्वारा राज्‍य/जिले, राज्‍यों के पास उपलब्‍ध लचीलेपन के अनुसार सीधे समुदाय को समग्र रूप से प्रोत्‍साहन निधियाँ अंतरित कर सकते हैं। सभी राज्‍यों में एसबीएम (जी) के कार्यान्‍वयन में वास्तविक तथा वित्‍तीय प्रगति की समीक्षा के लिए नियमित रूप से समीक्षा बैठकें की जाती हैं। इसके अलावा एसबीएम (जी) की प्रगति की समीक्षा और वास्तविक एवं वित्‍तीय उद्देश्‍यों की प्राप्‍ति के लिए जहां भी आवश्‍यक हो सुधारात्मक उपाय देने के लिए समीक्षा बैठकें और नियमित वीडियो कांफेरेंस भी आयोजित किए जाते हैं। स्‍वच्‍छता कार्यक्रम के कार्यान्‍वयन को देखने के लिए मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा फील्‍ड दौरे भी किए गए हैं। विभिन्‍न कार्यान्‍वयन चुनौतियों का समाधान करने में अभिनवों पर फीडबैक प्राप्‍त करने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर पर रैपिड एक्‍शन तथा लर्निंग यूनिट (आरएएलयू) तथा इसी तरह के आरएएलयू राज्‍य स्‍तर पर भी गठित किए जा रहे हैं। सुधारात्‍मक कार्यवाही तथा उत्‍तम रीतियों को बढ़ावा देने संबंधी सलाह प्रदान करने के लिए आरएएलयू छोटी, लचीलेपन वाली और विशेषीकृत यूनिटें हैं। यह यूनिट शीघ्र तथा प्रभावी समाधान ढूंढकर उन्‍हें विकसित करती है, फील्‍ड में वास्तविक रूप से कार्य कर रहे व्‍यक्‍तियों से साझा करके प्रसार करती है।

स्‍वच्‍छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्‍यों में से एक उद्देश्‍य ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्‍य जीवन की गुणवत्‍ता में सुधार लाना है। यह उद्देश्‍य तक तक प्राप्‍त नहीं किया जा सकता जब तक गांवों की सामान्‍य स्‍वच्‍छता उचित ढंग से व्‍यवस्‍थित नहीं की जाती है। एसएलडब्‍ल्‍यूएम के प्रभावी प्रबंधन के अंतर्गत, बायोडिग्रेडेबल तथा नॉन-बायोडिग्रेडेबल अपशिष्‍ट का प्रबंधन, गांवों में एकत्र गंदे पानी का प्रबंधन तथा गांवों की साफ-सफाई करना शामिल है।

ठोस और तरल अपशिष्‍ट प्रबंधन(एसएलडब्‍ल्‍यूएम), एसबीएम(जी) का महत्‍वपूर्ण घटक है। इस घटक के अंतर्गत कंपोस्‍ट पिट, वर्मी कंपोस्‍टिंग, बायोगैस प्‍लांट, कम लागत वाली निकास व्‍यवस्‍था, सोकेज चैनल/पिट्स, अपशिष्‍ट जल का पुन: उपयोग तथा घरेलू कूड़े को एकत्र करना, अलग करना और उसका निपटान करना तथा मासिक धर्म संबंधी स्‍वच्‍छता प्रबंधन आदि जैसी गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं।

पंचायती राज संस्‍थानों को कूड़ा इकट्ठा करने व उसका निपटान करने तथा पानी इकट्ठा होने की रोकथाम करने के लिए एक व्‍यवस्‍था अपनाने की जरूरत है। ठोस तथा तरल अपशिष्‍ट प्रबंधन गतिविधियों के लिए 150/300/500 और 500 से ऊपर के परिवारों वाली ग्राम पंचायतों के लिए क्रमश: 7/12/15/20 लाख तक की निधियां उपलबध हैं। केंद्र, राज्‍य/पंचायत/समुदाय के बीच वित्‍त पोषण ढांचा 60:40 (पूर्वोत्‍तर तथा विशिष्‍ट श्रेणी के राज्‍यों के मामले में 90:10) के अनुपात में होगा। इसके अलावा, एसएलडब्‍ल्‍यूएम के लिए मनरेगा के अंतर्गत प्रति ग्राम पंचायत के लिए 5 लाख तक की राशि उपलब्‍ध है। 14वें वित्त आयोग/राज्य निधियां/सीएसआर निधियों आदि के अंतर्गत निधियाँ उपलब्ध हैं।

सूचना, शिक्षा तथा संप्रेषण(आईईसी) स्‍वच्‍छ भारत मिशन(ग्रामीण) का एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण घटक है जो कार्यक्रम के सफल कार्यान्‍वयन का आधार है। लोगों को उचित स्‍वच्‍छता प्रथाओं में उनकी भूमिका, जिम्‍मेदारी तथा उसे अपनाने से प्राप्‍त होने वाले लाभ के विषय में सूचना देने, शिक्षित करने तथा प्रेरित करने के लिए यह एक प्‍लेटफार्म उपलब्ध कराता है। सुरक्षित स्‍वच्‍छता के विभिन्‍न पहलुओं पर व्‍यवहारगत परिवर्तन लाने, प्रभावी मांग सृजन करने, स्‍वास्‍थ्य और व्‍यक्‍तिगत साफ-सफाई के बीच संबंध स्‍थापित करने में आईईसी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्‍वच्‍छता सुविधाओं के लिए मांग सृजन में आईईसी की भूमिका सर्वविदित है। स्‍वच्‍छता कार्यक्रमों की सफलता और स्‍थायित्‍व के लिए सशक्‍त, जागरूक तथा कुशल हिस्‍सेदारों की आवश्‍यकता है जो स्‍वच्‍छता स्‍कीमों की आयोजना, कार्यान्‍वयन, प्रचालन, रख-रखाव तथा प्रबंधन के लिए सक्षम हों। स्‍वच्‍छ भारत मिशन(ग्रामीण) का फोकस सुरक्षित स्‍वच्‍छता और व्‍यक्‍तिगत साफ-सफाई को अपनाकर लोगों में व्‍यवहारगत परिवर्तन लाने पर है। लोगों को शिक्षित करने के लिए कार्यक्रम सामुदायिक भागीदारी पर बल देता है। कुल संसाधनों का 8% तक सूचना, शिक्षा और संप्रेषण (आईईसी) पर व्‍यय किया जा सकता है- इसमें से 5% तक राज्‍य और जिला स्‍तरों पर व्‍यय किया जा सकता है। राज्‍यों को सलाह दी गई है कि वे कम से कम 60% आईईसी निधियों को अंतर वैयक्‍तिक संप्रेषण (आईपीसी) गतिविधियों पर खर्च करें। कई राज्‍य सामुदायिक दृष्‍टिकोण पर बल दे रहे हैं जिसमें वे लोगों को प्रत्‍यक्ष तौर पर प्रेरित कर रहे हैं और कुछ प्रेरक उपकरणों का प्रयोग करके लोगों को स्‍वच्‍छता और व्‍यक्‍तिगत साफ-सफाई के महत्‍व के बारे में अवगत करा रहे हैं। इसके अलावा, लोगों को शिक्षित करने के लिए परंपरागत आईईसी उपकरणों का भी प्रयोग किया जा रहा है। लोगों को शिक्षा देने हेतु कलेक्‍टरों और प्रमुख हिस्‍सेदारों को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। परंपरागत आईईसी दृष्‍टिकोण जैसे पोस्‍टरों, पैम्फ्लेट, दीवार पर चित्रकारी आदि का प्रयोग किया जा सकता है परंतु उनकी अपील और प्रभाव सीमित होता है। प्रभाव सृजन का सबसे अच्‍छा तरीका है- समग्रवादी दृष्‍टिकोण अपनाना, जिससे भागीदारी तथा पद्धतियों द्वारा समुदाय सशक्‍त होता है जिससे स्‍वच्‍छता की स्‍थिति के संबंध में निर्णय लेने के लिए समुदाय सदस्‍यों के मस्‍तिष्‍क प्रेरित होते हैं। मास मीडिया व्‍यवहारगत परिवर्तन संप्रेषण (बीसीसी) पहलों से समुदाय स्‍तर पर संप्रेषण को बढ़ाया जा सकता है जो खुले में शौच और स्‍वच्‍छ वातावरण बनाए रखने से संबंधित सामाजिक और सांस्‍कृतिक मानदंडों में परिवर्तन लाने पर बल देता है जिससे न सिर्फ व्‍यवहारों में परिवर्तन होगा परंतु अधिक महत्‍वपूर्ण रूप से व्‍यवहारगत परिवर्तन को स्‍थायी बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

मंत्रालय ने ग्रामीण लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने, स्‍वच्‍छता सुविधाओं के मांग सृजन करने और स्‍वच्‍छ वातावरण के निर्माण के लिए बीसीसी गतिविधियों के कार्यान्‍वयन राज्‍यों के लिए एक व्‍यापक ढांचा उपलब्‍ध कराने हेतु स्‍वच्‍छता साफ-सफाई और संप्रेषण कार्यनीति (एसएचएसीएस) तैयार की है। एसएचएसीएस का फोकस अंतर-वैयक्‍तिक (आईपीसी) पर है जिस पर आईईसी का 60% खर्च किया जाना प्रस्‍तावित है।

9000 करोड़ रुपए की परियोजना लागत सहित स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए विश्व बैंक सहायता परियोजना को 23.03.2016 को अनुमोदन प्राप्त हुआ है। परियोजना में मुख्यत: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में राज्यों के कार्य निष्पादन के आधार पर राज्यों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। राज्यों के कार्य निष्पादन को संवितरण से जुड़े सूचकांकों (डीएलआई) नामक कुछ कार्य निष्पादन सूचकांकों के मापन के आधार पर एक स्वतंत्र सर्वेक्षण द्वारा आंका जाएगा। डीएलआई निम्नलिखित हैं :-

  • खुले में शौच करने में कमी
  • गावों में खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति का स्थायित्व।
  • बेहतर ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) से सेवित ग्रामीण आबादी के प्रतिशत में वृद्धि।

परियोजना के उद्देश्‍य हैं :-

  • ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच को कम करना।
  • खुले में शौच मुक्‍त गांव।
  • बेहतर ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन।
  • पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय की क्षमता को बढ़ाना।

एक प्रोत्‍साहन ढांचे के माध्‍यम से परियोजना द्वारा एसबीएम (जी) की प्रभावोत्‍पादकता में सुधार होगा जिससे राज्‍य, एसबीएम (जी) के इच्‍छित परिणामों तथा निष्‍कर्षों जैसे खुले में शौच में कमी, खुले में शौच मुक्‍त गांवों (ओडीएफ) के स्‍थायित्‍व की प्राप्‍ति तथा बेहतर ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्‍ल्‍यूएम) की प्राप्‍ति के लिए राज्यों के प्रयासों का पुन: विन्‍यास होगा। इस परियोजना से अन्‍य बातों के साथ-साथ व्‍यवहारगत परिवर्तन संवाद को सशक्‍त बनाने, क्षमता संवर्धन तथा कार्यक्रम प्रबंधन की दृष्‍टि से पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय, राज्‍यों, जिलों तथा जमीनी स्‍तर पर कार्यान्‍वयन क्षमता सशक्‍त होगी।

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