सामान्य प्रश्न

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का चरण II

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण-II में खुले में शौच से मुक्त स्थिति को बनाए रखने और ग्रामीण भारत में ठोस तथा तरल कचरा प्रबंधन (एस.एल.डब्ल्यू. एम) पर बल दिया जाएगा। कार्यक्रम में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति शौचालय से वंचित न रहे। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण -II का कार्यान्वयन मिशन मोड में वर्ष 2020 -21 से वर्ष 2024 -25 तक चलाया जाएगा।

भारत सरकार ने 2 अक्टूबर 2019 तक भारत को खुले में शौच की प्रथा से मुक्त करने और सफाई में सुधार लाकर समग्र स्वच्छता कवरेज प्राप्त करने में तेजी लाने के लिए 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का आरंभ किया था। यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन एक जन आंदोलन था जिसका लक्ष्य व्यापक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन करके घरों तथा समुदायों में शौचालयों का निर्माण करके तथा शौचालय के उपयोग की निगरानी हेतु एक जिम्मेदार तंत्र स्थापित करके वर्ष 2014 से 2019 की अवधि के दौरान खुले में शौच की प्रथा को खत्म करना था। मिशन के अंतर्गत, भारत के सभी गांवों, सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर तक अर्थात् 2 अक्टूबर 2019 तक स्वयं को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है।

  • मौजूदा वित्तीय प्रोत्साहन के मानदंडों के अनुसार नए पात्र घरों को वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों के निर्माण के लिए प्रति परिवार ₹12000 की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। केवल नए पात्र परिवारों को ही यह प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। जो परिवार पात्र नहीं होंगे उन्हें अपनी स्वयं की निधियों से शौचालय का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
  • सामुदायिक स्वच्छता परिसर का नाम बदलकर अब समुदाय प्रबंधित स्वच्छता परिसर (सीएमएससी) रखा गया है। समुदाय प्रबंधित स्वच्छता परिसर के लिए वित्तीय सहायता को ₹200000 से बढ़ाकर ₹300000 कर दिया गया है, ग्रामीण स्थानीय निकायों को 15 वें वित्त आयोग अनुदान से इस राशि का 30% अंश दिया जाएगा और शेष 70% धनराशि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत दी जाएगी।
  • आईईसी और क्षमता संवर्धन के लिए कुल परियोजना लागत के 5% का प्रावधान होगा, जिसमें 2% केंद्रीय स्तर पर उपयोग किया जाएगा (भारत सरकार के स्तर पर) और 3% राज्य / जिला स्तर पर उपयोग किया जाएगा।
  • प्रशासनिक लागत के लिए परियोजना लागत के 1% का प्रावधान होगा।
  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण II के अंतर्गत ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन से संबंधित कुछ कार्यों के लिए ब्लॉक और जिला स्तर के मध्यवर्तनों को भी शामिल किया गया है।
  • सामान्यत: ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के लिए प्रति व्यक्ति के आधार पर निधियन किया जाएगा न कि पूर्व की तरह ग्राम पंचायत में स्थित परिवारों की संख्या के आधार पर। ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के कार्यों के लिए ग्राम स्तर के 15 वें वित्त आयोग अनुदान से निधियन का 30% दिया जाएगा और शेष 70% स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत वहन किया जाएगा। तथापि, ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक कचरा प्रबंधन और जिला स्तर पर आदर्श गोबरधन परियोजना जैसी कुछ कार्यविधियों के लिए ब्लॉक और जिला हेतु एक निश्चित राशि की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
  • पहली बार 15 वें वित्त आयोग अनुदानों का 50% तक ग्रामीण स्थानीय निकायों हेतु जल एवं स्वच्छता के लिए चिह्नित किया गया है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण-II के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • लंबी अवधि तक गांव, ग्राम पंचायतों, ब्लॉक, जिलों और राज्यों के खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखना।
  • यह सुनिश्चित करना कि लोग शौचालयों का निरंतर उपयोग करें और सुरक्षित तथा व्यक्तिगत साफ सफाई के व्यवहार का पालन करें।
  • यह सुनिश्चित करना कि ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र सफाई हेतु ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था गांव में ही मौजूद हो।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना।

मुख्य गतिविधियां निम्नलिखित हैं:

  • वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों का निर्माण।
  • समुदाय प्रबंधित स्वच्छता परिसरों (सी.एम.एस.सी) का निर्माण।
  • ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन संबंधी गतिविधियां।
  • iv. व्यवहार परिवर्तन संवाद और सभी स्तरों पर क्षमता संवर्धन जारी रखना।

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के चरण-II में खुले में शौच मुक्त स्थिति से प्राप्त परिणामों को स्थाई बनाए रखने और गांव में प्रभावशाली ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था उपलब्ध कराने के कार्य में सभी को शामिल करते हुए स्वच्छता पर पुनः जन आंदोलन जागृत करने पर बल दिया जाएगा। इस कार्यनीति में राज्य और जिला स्तर पर, उनकी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार, चरण II के दिशानिर्देशों के ढांचे के अनुरूप कार्यक्रम के कार्यान्वयन में लचीलापन उपलब्ध कराया जाएगा। भारत सरकार समग्र वित्तीय सहायता, समन्वय और निगरानी तंत्र उपलब्ध कराएगी।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र तथा राज्यों के बीच पूर्वोत्तर राज्यों, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू एवं कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश हेतु वित्तीय हिस्सेदारी का ढांचा 90 :10 का है और शेष केंद्र प्रशासित क्षेत्रों के लिए यह 100:0 तथा अन्य राज्यों के लिए यह 60: 40 के अनुपात में है:

घटक वित्तीय सहायता
वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों के निर्माण हेतु प्रोत्साहन राशि (गरीबी रेखा से नीचे और गरीबी रेखा से ऊपर के चिन्हित परिवारों के लिए) ₹12000/-
(व्यक्तिगत साफ-सफाई बनाए रखने, हाथ धोने तथा सफाई हेतु जल भंडारण की सुविधा सहित)
ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन संबंधी कार्य विधियां ग्राम स्तर पर ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन कार्य विधियां गांव का आकार वित्तीय सहायता
5000 तक की आबादी बाला गांव ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन हेतु ₹60 प्रति व्यक्ति तक । गंदला जल के प्रबंधन हेतु ₹280 प्रति व्यक्ति तक
5000 से अधिक आबादी वाला गांव ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन हेतु ₹45 प्रति व्यक्ति तक । गंदले जल के प्रबंधन हेतु ₹660 प्रति व्यक्ति तक
नोट:
1. इस राशि का 30% ग्राम पंचायत द्वारा उन्हें दिए गए 15वें वित्त आयोग के अनुदान से वहन किया जाएगा।
2. प्रत्येक गांव अपनी आवश्यकता के आधार पर₹100000 का उपयोग कर सकते हैं।
3. कंपोस्ट पिट, सोक पिट और गंदे जल की प्रणाली के निर्माण हेतु मजदूरी लागत का वहन मनरेगा के तालमेल से किया जाएगा।
जिला स्तर पर ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन संबंधी कार्य विधियां
प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (प्रत्येक ब्लॉक में एक) 16 लाख रुपए प्रति इकाई तक।
मल गाद प्रबंधन(एफएसएम) ₹230 प्रति व्यक्ति तक
गोवर्धन परियोजनाएं 50 लाख रुपए जिला तक
समुदाय प्रबंधित स्वच्छता परिसर ₹3 लाख
नोट: इस राशि का 30% ग्राम पंचायत द्वारा 15 वें वित्त आयोग के अनुदान से वहन किया जाएगा
आईईसी और क्षमता संवर्धन कार्यक्रम संबंधी घटकों के लिए कुल निधि का 5% तक (राज्य/ जिला स्तर पर 3% तक उपयोग किया जा सकता है और केंद्रीय स्तर पर 2% तक)
प्रशासनिक व्यय कार्यक्रम संबंधी घटकों के लिए कुल निधियन का 1% तक
परीचक्राणी निधियां परियोजना परिव्यय का 5% तक
बशर्ते यह अधिकतम 1.5 करोड़ रुपए प्रति जिला हो, जिसे ग्रामीण स्वच्छता बाजार और उत्पादन केंद्रों की स्थापना के लिए ऋण के रूप में दिया जा सकता है, जिसे फिर 12 से 18 महीनों के समान किस्तों में वसूला जाएगा।
फ्लेक्सी निधियां योजना के समग्र उद्देश्य की प्राप्ति के लिए स्थानीय आवश्यकताओं और अपेक्षाओं की पूर्ति हेतु राज्य स्तर पर नवाचारों और तकनीकी विकल्पों के लिए इस संबंध में वित्त मंत्रालय द्वारा समय-समय पर जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य फ्लेक्सी निधियों का उपयोग कर सकते हैं।

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार अन्य स्रोतों जैसे 15वें वित्त आयोग के अनुदान, एमपीलैंड/एमएलएलैड/सीएसआर निधियों अथवा मनरेगा अथवा राज्य अथवा केंद्र सरकार की अन्य स्कीमों के तालमेल आदि से उच्चतर प्रोत्साहन राशि/ अतिरिक्त निधियां जुटा सकते हैं।

सभी नए पात्र परिवारों को व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालयों के निर्माण हेतु ₹12000 तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती रहेगी। पात्र परिवार निम्नलिखित होंगे:-

  • सभी गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवार
  • चिन्हित गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) के परिवार, जिनमें निम्नलिखित शामिल होंगे:-
    क. अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति
    ख. लघु एवं सीमांत किसान
    ग. अधिवास वाले भूमिहीन मजदूर
    घ. दिव्यांगजन सम्मिलित परिवार
    ङ. महिला प्रमुख परिवार

सभी नए एपीएल परिवार जो पात्र नहीं होंगे उन्हें अपनी स्वयं की निधियों से शौचालय का निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

₹12000 का यह प्रोत्साहन राशि शौचालय का निर्माण करने के लिए और शौचालय का उपयोग करने के लिए परिवारों को प्रोत्साहित करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय के निर्माण हेतु यह राशि पर्याप्त है। तथापि, यह शौचालय के निर्माण की लागत की प्रतिपूर्ति कदापि नहीं है, जो इससे अधिक भी हो सकती है। यदि कोई अतिरिक्त आवश्यकता हो तो वह लाभार्थी द्वारा वहन किया जाए।

ऐसे परिसरों के प्रचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होगी। समुदाय प्रबंधित स्वच्छता परिसरों के प्रचालन एवं रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत ऐसे सीएमएससी के दीर्घकालीन उपयोग हेतु पीपीपी मॉडल अथवा किसी अन्य राजस्व सूजन मॉडल पर बल दे सकता है (जैसे सार्वजनिक स्थानों पर अधिक संख्या में लोगों के उपयोग हेतु प्रयोग तथा शुल्क आधारित मॉडल)।

जिन परिवारों के पास व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालय का निर्माण करने के लिए पर्याप्त स्थान की कमी हो उनकी आवश्यकता और साथ ही प्रवासी मजदूरों/ मेलों/ पर्यटक स्थलों/ धार्मिक स्थानों आदि में उमड़ी भीड़ की आवश्यकता को पूरा करने के लिए गांव में समुदाय प्रबंधित स्वच्छता परिसर होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि ओडीएफ स्थिति को स्थाई बनाए रखना सुनिश्चित हो सके और कोई भी स्वच्छता की सुविधाओं से वंचित न रहे। ऐसे समुदाय प्रबंधित स्वच्छता परिसरों में पर्याप्त संख्या में शौचालय सीट, नहाने का स्थान. कपड़े आदि धोने का स्थान, हाथ धोने का बेसिन आदि होना चाहिए। ग्राम पंचायत समुदाय प्रबंधित स्वच्छता परिसर के निर्माण के लिए उचित स्थान का निर्धारण करेगा, जहां सभी के लिए सीएमएससी सुलभ हो, जहां पर्याप्त मात्रा में जलापूर्ति हो सके तथा दीर्घकालीन प्रचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित हो सके। समुदाय प्रबंधित स्वच्छता परिसर के निर्माण के लिए उन गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां प्रवासी मजदूर/घटती बढ़ती आबादी हो और जिन गांव में अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति की बस्तियां अधिक संख्या में मौजूद हों।

सामुदायिक शौचालय :

सामुदायिक शौचालय एक ऐसी सुविधा है जिसका निर्माण वहां किया जाता है जहां व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालय के निर्माण के लिए स्थान अथवा निधियों की उपलब्धता न हो। इसका उपयोग, स्वामित्व और प्रबंधन समुदाय के सदस्यों अथवा स्थानीय सरकारों द्वारा किया जाता है।

सार्वजनिक शौचालय :

सार्वजनिक शौचालय एक ऐसी सुविधा है जिसका निर्माण घटती बढ़ती आबादी जैसे प्रवासी मजदूरों, आगंतुकों और पर्यटकों आदि के उपयोग हेतु किया जाता है, जो ग्रामीण क्षेत्र के वाणिज्यिक, धार्मिक अथवा पर्यटक आकर्षण होने के कारण वहां बार-बार आते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत दोनों प्रकार के शौचालयों के लिए निधियन का मानदंड बनाया जाएगा।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का एक उद्देश्य गांव के समग्र स्वच्छता में सुधार लाना है जिसके लिए ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन महत्वपूर्ण है। अपेक्षित परिणामों को प्राप्त करने के लिए ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के अंतर्गत, कई गतिविधियां चलाई जा सकती हैं। तथापि, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के अंतर्गत, कुछ प्रमुख गतिविधियों को चिन्हित किया गया है और इन गतिविधियों की एक व्यापक सूची नीचे तालिका में दी गई है जो संपूर्ण नहीं है इससे अधिक गतिविधियां भी चलाई जा सकती हैं:-

प्रत्येक परिवार के पास पृथक्करण हेतु कूड़ादान हो
सार्वजनिक स्थानों पर पृथक्करण हेतु कूड़ा दान हो
कंपोस्ट पिट, तिपहिया वाहन/अन्य वाहन प्लास्टिक अपशिष्ट के लिए भंडारण की सुविधा
पृथक्करण, भंडारण और कंपोस्ट परिसर का निर्माण
एकत्रण और पृथक्करण का भुगतान
परिसर की सफाई और कचरे के पृथक्करण के लिए उचित उपकरण
ठोस कचरा प्रबंधन के लिए प्रचालन एवं रखरखाव
सोक पिट
गंदे जल के प्रबंधन की प्रणाली (डब्ल्यूएसपी आदि)
बड़े तालाबों में एरेशन (सफाई)
ड्रेनेज चैनल (मल जाल) की व्यवस्था
गंदले जल के प्रबंधन के लिए प्रचालन एवं रखरखाव
मासिक धर्म संबंधी कचरे का प्रबंधन (इंसीनरेटर - सीपीसीबी /एसपीसीबी अनुमोदित)
प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की इकाई (पी डब्ल्यू एम यू)
गांव के भंडारण स्थल से वाहन सहित कचरे की पी डब्ल्यू एम यू तक ढुलाई
प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन की इकाई का प्रचालन एवं रखरखाव
ट्रेंचिंग
मल गाद प्रबंधन संयंत्र
सहशोधन
सेप्टिक टैंक अथवा एकल पीट से मल को मशीन से निकालना और उसकी ढुलाई
मल-गाद प्रबंधन के लिए प्रचालन एवं रखरखाव
गोबर-धन आदर्श परियोजनाएं
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के एनएनबीओएमपी के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के अनुसार गोबर-धन परियोजनाओं को बढ़ाना (प्रति ब्लॉक हेतु न्यूनतम 10)
गोबर-धन परियोजनाओं के लिए प्रचालन एवं रखरखाव

गंगा तट पर स्थित गावों में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी और उसके बाद अन्य नदियों के तट पर बसे गांव, समुद्री तट पर बसे गांव और अन्य महत्वपूर्ण जल भंडारों के तट पर स्थित गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी। गंदले जल के प्रबंधन के लिए आमतौर पर बड़े गांव, जिनमें 5000 से अधिक की आबादी हो, को प्राथमिकता दी जाएगी। तथापि, जल जीवन मिशन /राज्य सरकारों के अन्य जलापूर्ति कार्यक्रमों के तालमेल से यह कार्य किया जाएगा (जिन गांवों में जहां नल जल आपूर्ति उपलब्ध कराई गई हो अथवा उपलब्ध कराने की योजना हो)।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत निम्नलिखित ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन गतिविधियों के लिए निधियों का उपयोग किया जा सकता है:-
(क) ठोस कचरा प्रबंधन
(i) जैविक कचरा
• कंपोस्ट बनाना: वर्मी/ पिट/ नाडेप
• घर-घर जाकर कचरा एकत्रित करने के लिए तिपहिया वाहन/ अन्य वाहन ताकि उसे ग्राम स्तर एकत्रण ,पृथक्करण और भंडारण केंद्रों तक पहुंचाया जा सके।
• गोबर-धन परियोजनाएं
(ii) प्लास्टिक कचरा
• ग्राम स्तर पर भंडारण की सुविधा
• जिला/ ब्लाक स्तर पर सामग्री वसूली की सुविधा
(ख) तरल कचरा प्रबंधन
(i) गंदले जल (ग्रे वाटर) का प्रबंधन
• 15 वे वित्त आयोग अनुदानों अथवा केंद्र/ राज्य सरकार की अन्य स्कीमों के साथ तालमेल करके अतिरिक्त निधियां जुटाकर डब्ल्यूएसपी अथवा किसी अन्य तकनीक जैसी गंदे जल के प्रबंधन प्रणाली को चलाने के लिए छूट देने के साथ-साथ सोक पिट बनाना (5000 तक की आबादी वाले छोटे गांव में)
• तालाब: जल स्थिरीकरण तालाब (डब्ल्यूएसपी) (सामुदायिक सोक पिट के अलावा 5000 से अधिक की आबादी वाले बड़े गांवों में डब्ल्यूएसपी अथवा कोई अन्य तकनीक आदि का प्रयोग करके गंदे जल का प्रबंधन किया जा सकता है।
[ग्राम पंचायत द्वारा उन्हें सौपे गए 15 वें वित्त आयोग के अनुदानों और /अथवा मनरेगा अथवा केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार की अन्य स्कीमों से तालमेल करके ग्राम पंचायतों को ड्रेनेज चैनल की व्यवस्था करनी है (घरों से ग्रे-वाटर को निपटान अथवा प्रबंधन के स्थल तक ले जाने के लिए मल-जाल]।
(ii) मल- गाद प्रबंधन
• ट्रेंचिंग
• सहशोधन
• मल गाद शोधन संयंत्र (एफएसटीपी)

[उपयुक्त व्यवसाय मॉडल के माध्यम से अथवा / और ग्राम पंचायत को दिए गए 15 वें वित्त आयोग के अनुदान अथवा / और राज्य या केंद्र सरकारों की अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण के माध्यम से सेप्टिक टैंकों / एकल पिट्स से मल गाद को खाली किया जाएगा और उसकी ढुलाई की जाएगी]

क. ग्राम स्तर की एसएलडब्ल्यूएम गतिविधियाँ

गाँव का आकार वित्तीय सहायता
5000 तक की आबादी प्रति व्यक्ति 340 रुपए तक
(ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के लिए प्रति व्यक्ति 60 रुपये तक और ग्रे-वाटर प्रबंधन के लिए प्रति व्यक्ति 280 रुपए तक)
5000 से अधिक की आबादी प्रति व्यक्ति 705 रुपए तक
(ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के लिए प्रति व्यक्ति 45 रुपये तक और ग्रेवाटर प्रबंधन के लिए प्रति व्यक्ति 660 रुपए तक)

नोट -1: प्रत्येक गांव अपनी आवश्यकताओं के आधार पर न्यूनतम 1 लाख रुपये का उपयोग कर सकता है।

नोट -2: ग्राम पंचायत 15 वें वित्त आयोग अनुदान से 30% हिस्से का वहन करेगा।

ख. जिला / ब्लॉक स्तर की एसएलडब्ल्यूएम गतिविधियाँ

गतिविधियाँ वित्तीय सहायता
प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (प्रत्येक ब्लॉक में एक) प्रति यूनिट 16 लाख रु. तक
मल गाद प्रबंधन (एफएसएम) प्रति व्यक्ति 230 रु. तक
गोबर-धन मॉडल परियोजनाएं प्रति जिला 50 लाख रुपये तक

किसी भी अन्य एसएलडब्ल्यूएम गतिविधि के लिए आवश्यक अतिरिक्त धन की पूर्ती 15 वें वित्त आयोग अनुदान, एमपीएलएडी / एमएलएएलएडी / सीएसआर निधि आदि से या राज्य या केंद्र सरकारों की अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण के माध्यम से की जा सकती है।

एसबीएम (जी) के चरण- II के तहत मार्गदर्शक सिद्धांत निम्नानुसार हैं: -

  • जहां तक संभव हो सामुदायिक संपत्तियों को प्राथमिकता दी जाए और उन्हें वित्तपोषित किया जाए: एक तरफ जहां व्यक्तिगत संपत्ती को प्रोत्साहित किया जाता है, कार्यक्रम के तहत सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण को प्राथमिकता दियी जाएगा ताकि ग्रामीण स्तर पर ठोस और तरल कचरे का व्यापक रुप से प्रबंधन हो सके। जहां तक संभव होगा सामुदायिक संपत्तियों को वित्तपोषित किया जाएगा, जबकि आईईसी चैनलों का उपयोग करके जहां भी संभव हो, परिवारों को व्यक्तिगत संपत्ति के निर्माण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण- II के तहत राज्य / केंद्रशासित प्रदेशों को तभी निधियां जारी की जाएंगी जब संबंधित सरकार पुष्टी देगी कि 15 वें वित्त आयोग के अनुदान के तहत स्वच्छता गतिविधियों के लिए चिह्नित निधियों को ग्रामीण स्थानीय निकायों को सौंपा गया है अथवा जा रहा है।
  • जहां भी संभव हो मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग हो: राज्य यह सुनिश्चित करे कि ऐसे गांवों में नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के बजाय मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग/मरम्मत/उन्नयन किया जाए।
  • अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण: राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण- II के परिणामों को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त अभिसरण तंत्र के माध्यम से अन्य कार्यक्रमों की निधियों, कार्यवाहियों और कार्यों का उपयोग करें। जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत ग्रामीण जल आपूर्ति प्रबंधन, गंदले जल के प्रबंधन आदि के सामान्य उद्देश्यों को देखते हुए, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण- II और जेजेएम के कार्यात्मक घटकों के बीच तालमेल सुनिश्चित किया जाएगा।
  • जल निकासी चैनलों की लागत का वहन ग्राम पंचायत 15 वें वित्त आयोग अनुदान से अथवा एमजीएनआरईजीएस अथवा राज्य या केंद्र सरकारों की अन्य योजनाओं के साथ तालमेल स्थापित करके पूरा करेगा। खाद के गड्ढों के निर्माण, ठोस अपशिष्ट के भंडारण, सोख गड्ढे और ग्रेवाटर सिस्टम (अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब इत्यादि) के मजदूरी लागत को जो अनुमानत: कुल लागत का 40% होगा एमजीएनआरईजीएस के साथ तालमेल करके वहन किया जाएगा।
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के साथ भी अभिसरण किया जाएगा ताकि व्यवहार परिवर्तन संचार के लिए एसएचजी को प्रेरक के रूप में शामिल किया जा सके। और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के साथ अभिसरण में स्वच्छाग्रहियों, अन्य क्षेत्र अधिकारियों और राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना तैयार की जाएगी।
  • अधिकतम पुन: उपयोग से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा: कार्यक्रम के आवश्यक तत्व निम्नीकरण, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण (रीड्यूस, रीयूज, रीसाइकल) होंगे।
  • एसबीएम (जी) चरण- II को लागू करने के लिए, जहां भी संभव हो, वित्त मंत्रालय की मंजूरी के साथ, उधार और ब्याज के हस्तक्षेप सहित लागत साझेदारी, लागत वसूली और राजस्व सृजन के सिद्धांतों पर आधारित व्यावसायिक मॉडल का उपयोग किया जाएगा।
  • कार्यक्रम के तहत बनाई गई परिसंपत्तियों के प्रचालन और रखरखाव का वित्तपोषण और प्रबंधित समुदाय / जीपी / जिले द्वारा किया जाएगा।
  • समुचित मॉडल के माध्यम से राज्यों द्वारा सामुदायिक जागृति और योजना के तहत बनाई गई संपत्तियों के रखरखाव के लिए भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
  • सामुदायिक संपत्तियों के प्रचालन एवं रख-रखाव और साथ ही आईईसी के लिए राज्यों द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधियों को जुटाया जाएगा।
  • कम से कम संचालन और रखरखाव लागत वाली प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित किया जाएगा: कम प्रचालन एवं रख-रखाव लागत पर आसानी से चलने और प्रबंधित होने वाली प्रौद्योगिकियों को चुना जाएगा।
  • राज्य अपनी स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार उपयुक्त तकनीकों का चयन करें: क्षेत्र की जल विज्ञान और स्थलाकृति के लिए सबसे उपयुक्त तकनीकों का चयन करें।
  • गांवों की समूह बनाना: एसएलडब्ल्यूएम गतिविधियों के लिए बड़े गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी और राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी स्थानीय स्थिति के अनुसार पर्याप्त लचीलेपन दिया जाएगा। बड़े पैमाने पर धन प्राप्त करने के लिए क्लस्टर स्तर के संसाधन केंद्रों का विकास करने के लिए राज्य उपयुक्त मापदंड जैसे परिवहन की दूरी, समय आदि के अनुसार गांवों का समूह (क्लस्टर) बनाएंगे।
  • सीएमएससी के निर्माण के लिए, ऐसी परियोजनाओं की स्थापना और इस तरह के परिसरों के प्रचालन एवं रख-रखाव के लागतों को पूरा करने के लिए स्व-राजस्व सृजन मॉडल के लिए पीपीपी मोड पर बल दिया जाएगा। व्यावसायिक मॉडल में परियोजनाओं के लिए धनराशि जुटाने की तलाश चुनौतीपूर्ण मोड में की जाएगी।
  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की वित्तीय सहायता हेतु एफएसएम के प्रस्ताव से पूर्व सिंगल लीच पिट्स में मरम्मत करके उसे ट्विन लेच पिट्स (या समकक्ष तकनीकों) में परिवर्तित करके मल को स्वस्थाने शोधित करने की व्यवहार्यता ( आईईसी /आईपीसी अथवा राज्य के अपनी/अन्य संसाधन के माध्यम से) पर विचार किया जाएगा। हालाँकि, जहाँ अभी भी एफएसएम की आवश्यकता है, राज्य अन्य मंत्रालयों / विभागों की योजनाओं के साथ अभिसरण के माध्यम से यांत्रिक सफाई / गड्ढों को खाली करना और मल की ढुलाई सुनिश्चित करेंगे।
  • गोबर-धन परियोजनाओं को स्थापित करने से पहले, राज्य परियोजना को चलाने की व्यवहार्यता सुनिश्चित करेंगे जैसे जैविक कचरे की निर्बाध उपलब्धता के लिए गौशालाओं के पास इसे स्थापित करने की व्यवहार्यता।
  • दिशा-निर्देशों में एक आउटपुट-आउटकम फ्रेमवर्क शामिल किया जाएगा। नियमित आधार पर आउटपुट-आउटकम की निगरानी की जाएगी और प्रस्तावित आउटपुट-परिणाम ढांचे के आधार पर तीसरे पक्ष द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा।
  • गंगा के किनारे स्थित गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी। अगली प्राथमिकता अन्य नदियों और जल निकायों (झीलों आदि) के तट पर स्थित गांवों को दी जाएगी।

पहले के प्रावधानों के तहत, छोटे ग्राम पंचायतों को एसएलडब्ल्यूएम के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता उनकी आवश्यकताओं की तुलना में बहुत अधिक थी (क्योंकि उनकी आवश्यकताएं खाद के गड्ढों (कंपोस्ट पिट) के निर्माण तक सीमित हैं) और बड़े ग्राम पंचायतों के लिए यह पर्याप्त नहीं था (उन्हें ग्रेवाटर प्रबंधन के लिए अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब (डब्ल्यूएसपी) आदि का निर्माण करना पड़ता था जिसमें बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता होती है)। इसके अलावा, पहले के मानदंडों के तहत, 500 से अधिक परिवारों वाले सभी ग्रामपंचायत को एसबीएम (जी) के सभी घटकों के लिए अधिकतम केवल 20 लाख रुपये मिल सकते थे। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई और गोबर-धन को छोड़कर, नए मानदंड में प्रति व्यक्ति के आधार पर निधियां प्रदान किया जाएगा; और अब एसएलडब्ल्यूएम की विभिन्न गतिविधियों के लिए अलग-अलग मानदंड निर्दिष्ट किए गए हैं। बड़े ग्राम पंचायतों के लिए उच्च दर निर्धारित की गई है ताकि वे ग्रे-वाटर प्रबंधन के लिए डब्ल्यूएसपी आदि का निर्माण कर सकें। नए मानदंडों और पिछले मानदंडों के तहत एसएलडब्ल्यूएम के लिए निधियों की उपलब्धता की तुलना नीचे तालिका में की गई है। देखा जा सकता है कि 5000 से अधिक आबादी वाले गांवों के लिए, एसएलडब्ल्यूएम के लिए निधियों की उपलब्धता पहले के मानदंडों की तुलना में नए मानदंडों के तहत बहुत अधिक होगी।

(राशि लाख रुपयों में)
परिवारों की संख्या नए एसएलडब्ल्यूएम नामदंड़ों के तहत पूर्व एसएलडब्ल्यूएम नामदंड़ों के तहत
(अनुमानत: प्रति परिवार 5 व्यक्ति) एसडब्ल्यूएम और सोक पिट/ ग्रे-वाटर प्रबंधन प्रणालियों (डब्ल्यूएसपी/डीईडब्ल्यूएटीएस आदि)
[5000 तक की आबादी वाले गांवों के लिए: प्रति व्यक्ति 340 रु. की दर से (एसडब्ल्यूएम के लिए 60 रु.+ सोक पिट के लिए 280 रु.]
जिला स्तर पर एफएसएम के लिए(प्रति व्यक्ति 230 रु. की दर से) कुल राशिएसडब्ल्यूएम, ग्रे-वाटर और एसएलएम के लिए(तक)[(2)+(3)] कुल एसएलडब्ल्यूएम लागत( 150/300/500/ 500 से अधिक परिवार वासे ग्राम पंचायत के लिए
[5000 से अधिक की आबादी वाले गांवों के लिए: प्रति व्यक्ति 705 रु. की दर से (एसडब्ल्यूएम के लिए 45 रु.+ ग्रे-वाटर प्रणाली के लिए 660 रु.] क्रमश: 7/12/15/20 लाख रु. तक )
1 2 3 4 5
150 2.55 1.73 4.28 7.00
300 5.10 3.45 8.55 12.00
500 8.50 5.75 14.25 15.00
600 10.20 6.90 17.10 20.00
700 11.90 8.05 19.95 20.00
800 13.60 9.20 22.80 20.00
1000 17.00 11.50 11.50 20.00
1100 38.78 12.65 51.43 20.00
1200 42.30 13.80 56.10 20.00
1500 52.88 17.25 70.13 20.00

ओडीएफ स्थायित्व का तात्पर्य है गाँवों के नए परिवारों सहित सभी लोगों द्वारा शौचालय का उपयोग जारी रखना और खुले में शौच न करना सुनिश्चित करते हुए गांव के खुले में शौच मुक्त स्थिति को स्थायी बनाए रखना ।

खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखने के लिए राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश अपना खुद का तरीका/तंत्र अपना सकते हैं। हालांकि, यह सलाह दी जाती है कि गांवों में कम से कम निम्नलिखित गतिविधियां चलाई जाएं:

  • नए परिवारों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराना।
  • तकनीकी रूप से असुरक्षित शौचालयों की मरम्मत।
  • जहां मरम्मत संभव न हो, ऐसे शौचालयों के लिए मल गाद प्रबंधन की व्यवस्था करना।
  • शौचालयों के उपयोग में कमी से बचने के लिए लोगों के व्यवहार परिवर्तन को बनाए रखने के लिए उन्हें प्रेरित करने के लिए स्वच्छाग्रहियों को नियोजित करना जारी रखना।
  • निगरानी समितियों, अधिकारियों द्वारा प्रात: कालीन जांच आदि के प्रावधान को जारी रखना।
  • ओडीओफ स्थिति के स्थायित्व का सत्यापन करना।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण II के लिए भी जिला स्वच्छ भारत मिशन [डीएसबीएम(जी)] कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेंगे। हालांकि, ओडीएफ प्लस गतिविधियों के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण II की आवश्यकताओं के अनुसार मानव संसाधन संरचना अथवा मौजूदा जनशक्ति के पुनर्संरचना में आवश्यक परिवर्तन किया जा सकता है। कार्यक्रम के कार्यान्वयन में संबद्ध विभाग एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाएंगे अत: जिला कलेक्टर / मजिस्ट्रेट / सीईओ जिला पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

73 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के अनुसार, स्वच्छता को 11 वीं अनुसूची में शामिल किया गया है और यह पंचायत की जिम्मेदारी बन गया है। जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर क्रमशः जिला पंचायत, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत गतिविधियों के लिए उत्तरदायी होंगे। हालाँकि, चूंकी गाँवों को एक इकाई के रूप रखते हुए इस कार्यक्रम को लागू किया जाएगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण II के कार्यान्वयन में ग्राम पंचायतों की प्रमुख भूमिका होगी। वीओ / गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से ग्राम पंचायतें शौचालय निर्माण के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे, ओडीएफ प्लस गतिविधियों को चलाने के लिए गांवों में आवश्यक सामुदायिक परिसंपत्तियों की आवश्यकताओं का आकलन करेंगे, ऐसी सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण और उसके ओएंडएम की जिम्मेदारी लेंगो और ओडीएफ को बनाए रखने हेतु निगरानी करेंगे। ग्राम पंचायत हर वर्ष अपने सभी गांवों के ओडीएफ स्थायित्व का सत्यापन भी करेंगे। पंचायतें उत्पादन केंद्र / ग्रामीण स्वच्छता मार्ट भी खोल सकती हैं और उसका संचालित कर सकती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में एसबीएम (जी) के कार्यान्वयन में गैर-सरकारी संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें आयोजना, आईईसी गतिविधियों के साथ-साथ उत्पादन केन्द्रों या ग्रामीण स्वच्छता मार्ट स्थापित करने में भी शामिल किया जा सकता है। गैर सरकारी संगठनों को विभिन्न राजस्व सृजन मॉडल के माध्यम से कार्यक्रम के तहत बनाई गई सामुदायिक संपत्तियों के ओ एंड एम में भी शामिल किया जा सकता है।

राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश राज्य और जिले की योजना के अनुसार आईईसी और सीबी गतिविधियों के लिए कार्यक्रम निधि का 3% तक उपयोग कर सकते हैं। सभी स्तरों पर क्षमता सुदृढ़ीकरण और ज्ञान साझा करने पर बल दिया जाएगा।

पंचायती राज संस्थाओं और जमीनी स्तर के पदाधिकारियों की क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए क्षमता निर्माण की पहलें जारी रहेंगी। राज्य / जिले ओडीएफ स्थिरता और ठोस तरल कचरा प्रबंधन के लिए सभी स्तरों पर क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए नई पहलें शुरु करने की योजना बना सकते हैं।

राज्यों और जिलों को सलाह दी गई है कि वे स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण II के मध्यवर्तनों को चलाने के लिए राज्य, जिला और ग्रामीण स्तरों पर पर्याप्त मानव संसाधन और कौशल सेट सहित संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध कराएं।

स्वच्छ भारत मिशन के दिशानिर्देशों के अनुसार विभिन्न स्तरों पर आदर्श मानव संसाधन की आवश्यकता की पूर्ती के लिए, विभिन्न कार्य क्षेत्रों में कार्यान्वित किए जा रहे कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए राज्य और जिला स्तर पर कार्य कर रहे परामर्शदाताओं को जारी रखा जा सकता है। जबकि राज्य सभी सलाहकारों (विशेषज्ञों) के पदों की विशेषज्ञता, अनुभव और कौशल सेट पर निर्णय ले सकते हैं, वे एसबीएम के चरण II के दिशानिर्देशों से मार्गदर्शन ले सकते हैं और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त नियुक्तियां कर सकते हैं।

परिणामों की प्रभावी निगरानी में ओडीएफ स्थिरता और गांवों में प्रभावी ठोस और तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पर प्रमुख बल दिया जाएगा। व्यय और निर्मित परिसंपत्तियों की निगरानी जैसे प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए भी आउटपुट की निगरानी की जाएगी। निगरानी ढांचा अनिवार्य रूप से दो प्रकार का होगा। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने एसबीएम (जी) के लिए एक ऑनलाइन निगरानी प्रणाली विकसित की है। जिलों और राज्यों द्वारा एमआईएस पर ओडीएफ स्थिरता और ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की स्थिति के संबंध में ग्राम स्तरीय आंकडे प्रविष्ट किए जाएंगे। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की सहमति से राज्यों को आवश्यकतानुसार स्थिति को अद्यतन करने की अनुमति दी जाएगी। राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश एसबीएम (जी) के चरण II के कार्यान्वयन पर आवधिक मूल्यांकन अध्ययन करा सकते हैं। ये मूल्यांकन पाठ्यक्रम सुधार और कार्यक्रम की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार के लिए प्रयोग किए जा सकते हैं। राज्य द्वारा निश्चित किए गए प्रतिष्ठित संस्थानों और संगठनों के माध्यम से मूल्यांकन अध्ययन किया जा सकता है और उसकी रिपोर्ट की प्रतियां भारत सरकार को प्रस्तुत की जानी चाहिए। इन मूल्यांकन अध्ययनों के आधार पर राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा उपचारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। इन अध्ययनों की लागत का भुगतान एसबीएम (जी) के प्रशासनिक प्रभार के घटक से किया जा सकता है।

स्वच्छता एक व्यवहारिक मुद्दा है और इसे स्थायी बनाए रखने के लिए इसकी सामाजिक स्वीकृति और आंतरिकीकरण महत्वपूर्ण है। स्वच्छता के संबंध में वर्तमान प्रथाओं का अध्ययन किया जा सकता है और खुले में शौच मुक्त स्थिति की प्राप्ती के साथ उभरे नए मानदंडों को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। ओडीएफ विषयों की उपलब्धि के बाद जिन क्षेत्रों में व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता है, उन्हें चिह्नित करके अधिकतम प्रभाव वाले माध्यमों और उपकरणों से उनको समझाया जाएगा। पाँच प्रमुख विषयों, जैसा कि योजना में दर्शाया गया है, पर बल दिया जाएगा, आईईसी के दौरान - शौचालयों का निरंतर उपयोग, शौचालय प्रौद्योगिकी, कार्यक्रम के तहत निर्मित संपत्तियों का ओ एंड एम, ठोस और तरल कचरा प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) - प्रमुख हितधारकों / प्रभावितों का क्षमता निर्माण और सामुदायिक प्रणालियों को सुदृढ़ करना। उपरोक्त सभी घटकों के मुख्य संदेश विकसित किए जा सकते हैं और मुख्य बाधाओं के निपटान हेतु उन्हें प्रासंगिक बनाया जा सकता है। राज्यों और जिलों को नवीन और समावेशी आईसी हस्तक्षेपों का उपयोग करके खुले में शौच की प्रथा से मुक्ति के परिणाम को बनाए रखने के लिए समुदायों और परिवारों के साथ संपर्क जारी रखना चाहिए। राज्य, जिला और गाँव के स्तर पर आईईसी योजना और वितरण में शामिल कुशल मानव संसाधन और स्वच्छाग्रहियों को बहाल रखना चाहिए और उन्हें भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार और राज्य सरकारों के निर्णय के अनुसार प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आईईसी और क्षमता निर्माण घटक के लिए कार्यक्रम के घटकों की कुल निधियों के 5% तक (केंद्रीय स्तर पर 2% तक और राज्य / जिला स्तर पर 3% तक) का प्रावधान होगा।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का चरण II, वित्त पोषण के विभिन्न कार्यक्षेत्रों और भारत सरकार और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं के बीच अभिसरण का एक आदर्श मॉडल होगा।

जैसा कि 2020-21 के लिए 15 वें वित्त आयोग की अंतरिम रिपोर्ट में वर्णित है, ग्रामीण स्थानीय निकायों को दिए गए 15 वें वित्त आयोग के अनुदानों का 50% जल और स्वच्छता के लिए बंधे अनुदान के रूप में प्रदान किया गया है और आशा है की बाद के वर्षों में भी इसी तरह से धनराशि प्रदान की जाएगी, 15वे वित्त आयोग अनुदान का 30% स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के चरण II के वित्तपोषण के तहत ग्रामीण स्तर की सामुदायिक परिसंपत्तियों के लिए विनियोजित किया गया है।

एसबीएम-जी के तहत चलाई जाने वाली गतिविधियों के अलावा, स्वच्छता गतिविधियों के लिए 15 वें वित्त आयोग के अनुदान का उपयोग अन्य एसएलडब्ल्यूएम गतिविधियों, सामुदायिक संपत्तियों के ओ एंड एम के लिए भी किया जा सकता है।

एमजीएनआरईजीएस निधियों का उपयोग विभिन्न गतिविधियों जैसे कि सो पिट, कंपोस्ट पिट, जल निकासी चैनल का निर्माण, सामुदायिक संपत्ति के निर्माण के लिए श्रमिकों के भुगतान आदि के लिए भी किया जा सकता है।

गोबर-धन परियोजनाओं की अधिक बढ़ाने के लिए, परिवारों और सामुदायिक स्तर की परियोजनाओं के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एनएनबीओएमपी योजना के साथ अभिसरण किया जा सकता है और सीबीजी संयंत्रों के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एसएटीएटी योजना के साथ अभिसरण किया जा सकता है।

मल गाद के सह-शोधन के लिए, भारत सरकार या राज्य सरकारों की योजनाओं के तहत गठित अथवा निजि इकाई द्वारा स्थापित मौजूदा एफएसटीपी के साथ अभिसरण करने की योजना बनाने की आवश्यकता होगी।

एसबीएम (जी) के चरण II कार्यक्रम में क्षमता निर्माण और आईसी के बीच अभिसरण स्थापित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के साथ अभिसरण में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को व्यवहार परिवर्तन संचार हेतु शामिल किया जा सकता है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के कार्यक्रमों के साथ तालमेल स्थापित करके विभिन्न स्तरों पर स्वच्छाग्रहियों, अन्य क्षेत्र अधिकारियों और राजमिस्त्री को प्रशिक्षण देने की योजना तैयार की जा सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी गतिविधियों की अतिरिक्त धन की आवश्यकताओं को पूरा करने एसबीएम (जी) अनुदानों और 15 वें वित्त आयोग में स्वच्छता के लिए चिह्नित अनुदानों के अलावा और एसबीएम (जी) के तहत वित्त पोषित नहीं किए गए गतिविधियों को पूरा करने के लिए निम्नलिखित धनस्रोतों का उपयोग किया जा सकता है:-

  • एमजीएनआरईजीएस निधियाँ
  • एमपीलैड / एमएलएलैड
  • सीएसआर निधियां
  • व्यापार मॉडल
  • पीपीपी मॉडल
  • भारत सरकार, राज्य सरकारों की कोई भी अन्य योजना, जो स्वच्छता संबंधी गतिविधियों के लिए धन के उपयोग की अनुमति देती है
  • सामुदायिक योगदान

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का चरण I

पूर्व में चलाए जा रहे निर्मल भारत अभियान (एनबीए) में संशोधन करते हुए दिनांक 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरूआत की गई, यह एक समुदाय-चालित तथा जन-उन्मुखी कार्यक्रम हैं जिसका उद्देश्य सर्वव्यापी सुरक्षित स्वच्छता से है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित केवल स्वच्छता कार्यक्रम है।

सरकार ने भारत में वर्ष 2019 तक हर जगह स्वच्छता लाने, स्वच्छता की स्थिति में सुधार करने और देश में खुले में शौच करने की प्रथा को समाप्त करने के प्रयासों में वृद्धि लाने के लिए 02 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) शुरू किया। यह कार्यक्रम देश में स्वच्छता और साफ-सफाई में सुधार लाने का सबसे बड़ा अभियान माना जाता है। इस कार्यक्रम की सफलता शौचालयों की मांग सृजित करने पर निर्भर करती है, जिसके परिणामस्वररूप उनका निर्माण और सभी पारिवारिक सदस्यों द्वारा उनका स्थायी रूप से उपयोग संभव हो सके। इसका लक्ष्य आबादी के मध्य बेहतर वैयक्तिक साफ-सफाई के व्यवहार को बढ़ावा देना और देश के गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्यूएम) परियोजनाओं को शुरू करके सफाई में सुधार लाना भी है। इस कार्यक्रम में प्रशिक्षित कार्मिकों की सेवाएँ लेकर, वित्तीय प्रोत्साहन देकर और आयोजना एवं मॉनीटरिंग के लिए सिस्टम और प्रक्रियाएँ बनाकर सहयोग देकर बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत व्यवहारगत परिवर्तन के कार्यों पर जोर देना है, जिसमें अंतरवैयक्तिक संप्रेषण, कार्यान्वयन और सेवा प्रणाली को ग्राम पंचायत स्तर तक सशक्त बनाना और राज्यों को उनकी स्थानीय संस्कृतियों, प्रथाओं, संवेदनाओं और मांगों के आधार पर सुविधा तंत्र को डिजाइन करने में लचीलापन देना शामिल है।

  • निर्मल भारत अभियान (एनबीए) को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में पुनः निर्मित किया गया।
  • आईएचएचएल की इकाई लागत को 10,000/- रूपये से बढ़ाकर 12,000/- रु. किया गया, ताकि जल की उपलब्धता, भंडारण, हाथ-प्रक्षालन तथा शौचालयों की सफाई आदि के लिए जल उपलब्ध हो।
  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से आईएचएचएल के लिए केंद्रीय हिस्सा‍ 72,00/- (60%) होगा। राज्य का हिस्सा 4800/- रुपये (40%) होगा। पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर तथा विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों के लिए केन्द्रीय हिस्सा 10,800/- है तथा राज्य का हिस्सा 12,00/- रुपये है (90% : 10%)। अन्य स्रोतों से अतिरिक्त अंशदान स्वीकृत किया जाएगा।
  • कुल परियोजनागत लागत का 8% आईईसी के प्रावधान के लिए होगा जिसका 3% केन्द्रीय स्तर पर तथा 5% राज्य स्तर पर उपयोग किया जाएगा।
  • प्रशासनिक लागत के प्रावधान के लिए परियोजना लागत का 2% उपलब्ध होगा। केंद्र तथा राज्य के बीच हिस्सेदारी का ढांचा 60 : 40 का होगा।
  • वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों (आईएचएचएल) के निर्माण के लिए प्रोत्साहन के भुगतान के लिए मनरेगा से आंशिक वित्तपोषण बंद कर दिया गया है तथा भारत सरकार के हिस्से की संपूर्ण राशि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से दी जाती है।
  • एसएलडब्ल्यूएम का वित्तपोषण 60 : 40 के अंशदान के ढाँचे में होगा। सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (सीएससी) के अंशदान के लिए यह 60:30:10 होगा (केंद्र : राज्य : समुदाय)। सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण तभी होगा जब ग्राम पंचायत उसके स्वामित्व की जिम्मेदारी ले और सतत् प्रचालन एवं रखरखाव की प्रणाली सुनिश्चित करे।
  • सभी स्कूली शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को तथा आंगनवाड़ी शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्रालय को अंतरित की गई है।
  • निगरानी तंत्र को मजबूत बनाया जाएगा। परिणामों (निर्माण) तथा निष्कर्षों (उपयोग) की निगरानी की जाएगी।
  • स्व्च्छ भारत मिशन द्वारा शौचालयों तथा एसएलडब्यूएम की परियोजनाओं के लिए प्रामाणिक तकनीकी विकल्पों की सूची राज्यों को उपलब्ध कराई जाएगी। मिशन, न्यूनतम स्वीकृति योग्य तकनीकों की सूची उपलब्ध कराएगा जिनके लिए इस कार्यक्रम के अंतर्गत सहायता उपलब्ध होगी। तथापि लाभार्थी द्वारा अतिरिक्त लागत का वहन किए जाने पर ही उच्च प्रौद्योगिकी के उपयोग की स्वीकृति होगी।

एसबीएम (जी) के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की सामान्य गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए स्वच्छता, व्यक्तिगत साफ-सफाई तथा खुले में शौच को बन्द करने को प्रोत्साहन देना
  • आईएचएचएल की इकाई लागत को 10,000/- रूपये से बढ़ाकर 12,000/- रु. किया गया, ताकि जल की उपलब्धता, भंडारण, हाथ-प्रक्षालन तथा शौचालयों की सफाई आदि के लिए जल उपलब्ध हो।
  • स्वच्छ भारत की संकल्पना को दिनांक 2 अक्टूबर 2019 तक प्राप्त करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के कवरेज को बढ़ाना।
  • जागरूकता पैदा करके तथा स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा के माध्यम से समुदायों तथा पंचायती राज संस्थाओं को सतत् स्वच्छता बनाए रखने तथा सुविधाओं के प्रयोग के लिए प्रेरित करना।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा तथा निरंतर स्वच्छता के लिए प्रभावपूर्ण लागत तथा उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
  • समुदाय द्वारा प्रबंधित स्वच्छता प्रणालियों का विकास करना, जहाँ भी आवश्यक हो, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण स्वच्छता के लिए वैज्ञानिक ठोस एवं तरल अपशिष्ट, पदार्थ प्रबंधन पर बल दिया जाए।

मुख्य गतिविधियां हैं :

  • वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों (आईएचएचएल) का निर्माण।
  • सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (सीएससी) का निर्माण।
  • ठोस तथा अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्यूएम) की गतिविधियाँ।
  • सूचना, शिक्षा तथा संप्रेषण (आईईसी) तथा मानव संसाधन विकास (एचआरडी) की गतिविधियां।
What are the incentives for IHHL toilets?
क्रम संख्‍या घटक एसबीएम (जी) परियोजना परिव्‍यय के प्रतिशत के रूप में चिह्नित राशि अंशदान का ढांचा
(भारत सरकार)
अंशदान का ढांचा
(राज्‍य)
अंशदान का ढांचा
(लाभार्थी परिवार/ समुदाय)
1. वैयक्‍तिक पारिवारिक शौचालय पूर्ण कवरेज के लिए वास्‍तव में आवश्‍यक राशि 7200 रू. (60%) (पूर्वोत्‍त्‍ार राज्‍यों, जम्‍मू और कश्‍मीर तथा विशेष दर्जा प्राप्‍त राज्‍यों के लिए 10,800 रू. (90%)) 4800 रू. (40%) (पूर्वोत्‍तर राज्‍यों, जम्‍मू और कश्‍मीर तथा विशेष दर्जा प्राप्‍त राज्‍यों के लिए 1,200 रू. (10%))  
2. सामुदायिक स्‍वच्‍छता परिसर पूर्ण कवरेज के लिए वास्‍तव में आवश्‍यक राशि 60% 30% 10%
3. ठोस / तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन (मूल लागत) स्‍वीकृत सीमाओं के भीतर एसएलडब्‍ल्‍यूएम परियोजना लागत के अनुसार वास्तविक राशि 60% 40%  
4. आईईसी घटक आबंटन का 8% (राष्‍ट्रीय स्‍तर पर 3%; राज्‍य स्‍तर पर 5%) 60% 40%  
5. प्रशासनिक लागत राज्‍य आबंटन का 2% 60% 40%  

पूर्वोत्तर और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए विभाजन ढांचा 90:10 है।

खुले में शौच से मुक्‍त स्‍थिति को निम्‍न प्रकार से परिभाषित किया गया है

"ओडीएफ ‘मल-मौखिक’ संचारण का समापन है, जो निम्‍नानुसार परिभाषित होगा:

  • वातावरण/गांव में किसी प्रकार का मल दृष्‍टिगत न होना।
  • प्रत्‍येक परिवार और साथ ही सार्वजनिक/सामुदायिक संस्‍थानों द्वारा मल के निपटान हेतु सुरक्षित तकनीकी विकल्‍प का प्रयोग हो।

(सलाह : सुरक्षित तकनीकी विकल्‍प का अर्थ है सतही मिट्टी, भूजल अथवा सतही जल में किसी प्रकार का संदूषण न होना, मल का मक्‍खियों तथा जानवरों की पहुंच से दूर होना, दुर्गंध तथा भद्दी स्‍थिति से मुक्‍त होना।)’’

भारत सरकार और संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों की सहायता से राज्य/ संघ राज्य क्षेत्रों के जिलों में एसबीएम (जी) का कार्यान्वयन किया जा रहा है। जिला स्तर पर, जिला पंचायत, परियोजना का कार्यान्वयन करती है। यदि जिला पंचायत क्रियाशील न हो तो जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम) एसबीएम (जी) का कार्यान्वयन कर सकती है। इसी प्रकार से, ब्लॉक और पंचायत स्तरों पर, पंचायत समिति और संबंधित ग्राम पंचायतों को एसबीएम (जी) के कार्यान्वयन में शामिल किया गया है।

73वे संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1992 के अनुसार, स्वच्छता 11वीं सूची में शामिल है और पंचायतों की जिम्मेदारी है। जिला स्तर पर, परियोजना का कार्यान्वयन जिला पंचायत करती है। इसी प्रकार से, ब्लॉक तथा पंचायत स्तर पर पंचायत समिति और संबंधित ग्राम पंचायतें एसबीएम (जी) कार्यक्रम के कार्यान्वयन में शामिल हैं। ग्राम पंचायतें स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के कार्यान्वयन में वीओ/ एनजीओ के साथ मिलकर शौचालयों के निर्माण और सुरक्षित अपशिष्ट निपटान द्वारा स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए लोगों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। निर्मित सामान्य सुविधाओं के प्रचालन एवं रखरखाव की मुख्य जिम्मेदारी उनकी है। पंचायतें उत्पादन केंद्र/ ग्रामीण स्वच्छता बाजार खोल सकते हैं और उनका संचालन कर सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में एसबीएम (जी) के कार्यान्वयन में एनजीओ की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें आईईसी गतिविधियों और साथ ही साथ पीसी अथवा आरएसएम स्थापित करने में शामिल किया जा सकता है। उनकी सेवाओं की आवश्यकता न सिर्फ ग्रामीण स्वच्छता की आवश्यकता के लिए ग्रामीण लोगों के मध्य जागरूकता पैदा करने की है बल्कि स्वच्छ शौचालयों का उपयोग सुनिश्चित करने की भी है। एनजीओ, उत्पादन केंद्र और ग्रामीण स्वच्छता बाजार खोल सकते हैं और उसका संचालन कर सकते हैं। तथापि, केवल समर्पित और प्रेरित एनजीओ को एसबीएम (जी) कार्यान्वयन में शामिल करना चाहिए।

एसबीएम (जी), जिसे 02.10.2014 से कार्यान्‍वित किया जा रहा है, के अंतर्गत निम्‍नलिखित नई पहलें शुरू की गई हैं :

  • व्‍यवहारगत परिवर्तन पर जोर दिया गया है। राज्‍यों को समुदाय आधारित सामूहिक व्‍यवहारगत परिवर्तन को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। ऐसा इस कारण से किया गया है कि स्‍वच्‍छता मानसिकता का मुद्दा है और शौचालयों का उपयोग महत्‍वपूर्ण है।
  • समुदाय आधारित स्‍थानीय चैंपियन भारी संख्या में उभर कर सामने आ रहे हैं जो एसबीएम (जी) को एक नागरिक आंदोलन के रूप में बदल रहे हैं। इन चैंपियनों द्वारा निभाई गई भूमिकाओं को प्रदर्शित करने वाली सफलता की कुछ कहानियों को ‘ऐन ओपेन माइंड’ नामक पुस्‍तिका के रूप में प्रकाशित किया गया है।
  • राज्‍यों को कार्यान्‍वयन में लचीलापन दिया गया है, क्‍योंकि स्‍वच्‍छता राज्‍य का विषय है और सामाजिक आर्थिक-सांस्‍कृतिक दशाएँ हर राज्‍य में अलग होती हैं। कलेक्‍टरों का प्रशिक्षण 30-30 के बैच में शुरू किया गया है। देश भर से लगभग 470 कलेक्‍टरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस प्रशिक्षण द्वारा कलेक्‍टरों को सामुदायिक दृष्‍टिकोण और जगह-जगह की सफल कहानियों से परिचित कराया गया है।
  • अधिकारियों को उनके प्रवेश के स्‍तर पर ही इस कार्यक्रम की जानकारी उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से एलबीएसएनएए, मसूरी के लिए एक प्रशिक्षण माड्यूल बनाया गया है। इसके अंतर्गत भारतीय प्रशासनिक सेवा और अन्‍य ग्रुप ‘ए’ प्रोबेशनरों को एसबीएम(जी) के बेहतर कार्यान्‍वयन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समुदाय में व्‍यवहारगत परिवर्तन के लिए ‘ट्रिगरिंग’ भी इस प्रशिक्षण का हिस्‍सा है।
  • पब्लिक डोमेन/ऑन लाइन मॉनीटरिंग प्रणाली में उपलब्‍ध वैयक्‍तिक पारिवारिक शौचालय के लाभार्थियों के नाम और पतों को शामिल कर सभी डाटा तैयार करके एसबीएम(जी) के कार्यान्‍वयन हेतु ऑनलाइन मॉनीटरिंग को सुदृढ़ किया गया है और पारदर्शिता बढ़ाई गई है। दिनाँक 2 अक्टूबर, 2014 के बाद निर्मित शौचालयों के फोटो अपलोड करने के लिए एक मोबाइल एप्‍लीकेशन बनाया गया है।
  • स्‍वच्‍छता अभियान नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं। दिनाँक 25 सितम्‍बर, 2014 से 31 अक्‍टूबर, 2014 तक देश भर में राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छता अभियान आयोजित किया गया था। इसके बाद देश भर में 16 से 22 मार्च, 2015 तक जल एवं स्‍वच्‍छता जागरूकता सप्‍ताह मनाया गया। यह अभियान जुलाई और अगस्‍त, 2015 में चलाया गया एवं अभियान पुन: सितम्‍बर और अक्‍टूबर 2015 में चलाया गया।
  • विश्व हाथ धुलाई दिवस- 15 अक्‍टूबर, 2014 और 2015 को ‘विश्‍व हाथ धुलाई दिवस’ मनाया गया। मध्‍य प्रदेश राज्य ने 2014 में एक दिन में 3 लाख से अधिक बच्‍चों द्वारा हाथ धोने की गतिविधियाँ आयोजित करके विश्‍व रिकार्ड बनाया था।
  • राष्ट्रीय स्‍तर पर श्रव्‍य-दृश्‍य (टीवी) तथा श्रव्‍य (रेडियो) माध्‍यमों के प्रयोग द्वारा व्‍यापक मीडिया अभियान शुरू किया गया है। राज्‍य भी आईईसी अभियान चला रहे हैं।
  • सामाजिक मीडिया का उपयोग – भारत सरकार तथा सभी राज्‍यों के अधिकारियों को शामिल करके एक स्‍वच्‍छ भारत वाट्सऐप समूह बनाया गया है। इसी प्रकार का समूह प्रत्‍येक राज्‍य में भी बनाया गया है। एसबीएम(जी) का एक फेसबुक पेज भी बनाया गया है।
  • राज्‍यों को ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडबल्‍यूएम) दिशा-निर्देश परिचालित किए गए हैं। गाँवों में ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट गतिविधियाँ शुरू करने हेतु राज्‍यों को प्रेरित करने के लिए अनेक राष्‍ट्रीय एवं क्षेत्रीय कार्यशालाएँ आयोजित की गईं।
  • नवाचारों का प्रदर्शन (इंडोवेशन) आयोजित किया गया - नई दिल्‍ली में दिनांक 26-27 अगस्‍त 2014, 23-24 जनवरी, 2015 और 2-3 जुलाई, 2015 को तीन प्रदर्शनियाँ आयोजित की गईं, जिनमें शौचालय, ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन तथा जल शोधन से संबंधित विभिन्न अभिनव तकनीकों को विभिन्‍न हिस्‍सेदारों/उपयोगकर्ताओं को प्रदर्शित किया गया, जिनमें विभिन्‍न राज्‍य सरकारें, एनजीओ तथा अनुसंधान एवं शैक्षिक संस्‍थाएँ भी शामिल थीं।
  • अभिनव तकनीकों का परीक्षण करने के लिए डॉ. आर ए माशेलकर की अध्‍यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई। इस समिति ने विभिन्‍न अभिनव तकनीकों की सूची बनाई और इन तकनीकों का एक सार संग्रह बना कर प्रकाशित किया और विभिन्‍न हिस्‍सेदारों के लाभ हेतु इस संग्रह को मंत्रालय की वैबसाइट पर डाला गया है।
  • मंत्रालय की वैबसाइट पर एक लिंक सृजित किया गया है, जहाँ अन्‍वेषक, निर्माता और अन्‍य हिस्‍सेदार अपनी तकनीकों/विचारों/अन्‍वेषणों का प्रदर्शन कर सकते हैं।
  • राज्‍यों को उनकी स्‍वतंत्र रूप से प्रमाणित प्रगति और स्‍वच्‍छता की निरंतरता के आधार पर प्रोत्‍साहन देने के लिए 9000 करोड़ रूपये की विश्‍व बैंक परियोजना अनुमोदित की गई है।
  • खुले में शौचमुक्‍त (ओडीएफ) को परिभाषित किया गया है और खुले में शौच मुक्‍त सत्यापन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
  • 175 जिलों को एक वर्ष के अंदर ओडीएफ बनाने के लिए फेज-1 जिलों के रूप में इनकी पहचान की गई है।
  • ग्राम पंचायत स्‍तर तक स्‍वच्‍छता की स्‍थिति को देखने के लिए मोबाइल ऐप भी विकसित किया गया है।

ग्राम पंचायत स्‍तर के आंकड़ों सहित एसबीएम (जी) के लिए व्‍यापक वेब-आधारित ऑनलाइन मॉनीटरिंग प्रणालियां उपलब्‍ध है। जिला तथा राज्‍य स्‍तरों पर आंकड़े अद्यतन किए जाते हैं। आंकड़ों के प्रमाणीकरण के लिए लाभार्थियों के लिए नाम तथा कार्ड संख्‍या अपलोड करने की सुविधा के साथ प्रणाली को अद्यतन किया गया है। मंत्रालय के एसबीएम (जी), एमआईएस पर आधारभूत सर्वेक्षण से देश के सभी 18.17 करोड़ परिवारों के आंकड़ों को प्रविष्‍ट करके राज्‍यों के साथ सशक्‍त बनाया गया है। शौचालयों में स्‍वच्‍छता कवरेज की घरेलू स्‍तर पर कड़ी मॉनीटरिंग सुनिश्‍चित करने के लिए ऐसा किया गया है। परिवारों के नामों द्वारा कवरेज की मासिक प्रगति की मॉनीटरिंग भी की जाती है। दिनांक 2 अक्‍टूबर, 2014 के बाद निर्मित शौचालयों के चित्र अपलोड करने के लिए एक मोबाइल ऐप्‍लीकेशन भी शुरू किया गया है। चित्र जीयो-टैग्ड होते हैं। ग्राम पंचायत स्‍तर तक स्‍वच्‍छता स्‍थिति का पता लगाने के लिए मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है। चरण 1 जिलों के रूप में 175 जिलों की पहचान की गई है, उन्‍हें एक वर्ष के भीतर ओडिएफ बनाया जाएगा। इन जिलों को विशेष रूप से मॉनीटर किया जा रहा है। राष्‍ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संस्‍थान (एनएसएसओ) जैसी एजेंसियों द्वारा तीसरे पक्ष द्वारा मॉनीटरिंग भी की जा रही है। आईएमआईएस पर ओडीएफ की मॉनीटरिंग के लिए भी मॉड्यूल उपलब्‍ध है। इसके अतिरिक्‍त आईएमआईएस पर एक ऐसा मॉड्यूल भी है जिसके द्वारा राज्‍य/जिले, राज्‍यों के पास उपलब्‍ध लचीलेपन के अनुसार सीधे समुदाय को समग्र रूप से प्रोत्‍साहन निधियाँ अंतरित कर सकते हैं। सभी राज्‍यों में एसबीएम (जी) के कार्यान्‍वयन में वास्तविक तथा वित्‍तीय प्रगति की समीक्षा के लिए नियमित रूप से समीक्षा बैठकें की जाती हैं। इसके अलावा एसबीएम (जी) की प्रगति की समीक्षा और वास्तविक एवं वित्‍तीय उद्देश्‍यों की प्राप्‍ति के लिए जहां भी आवश्‍यक हो सुधारात्मक उपाय देने के लिए समीक्षा बैठकें और नियमित वीडियो कांफेरेंस भी आयोजित किए जाते हैं। स्‍वच्‍छता कार्यक्रम के कार्यान्‍वयन को देखने के लिए मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा फील्‍ड दौरे भी किए गए हैं। विभिन्‍न कार्यान्‍वयन चुनौतियों का समाधान करने में अभिनवों पर फीडबैक प्राप्‍त करने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर पर रैपिड एक्‍शन तथा लर्निंग यूनिट (आरएएलयू) तथा इसी तरह के आरएएलयू राज्‍य स्‍तर पर भी गठित किए जा रहे हैं। सुधारात्‍मक कार्यवाही तथा उत्‍तम रीतियों को बढ़ावा देने संबंधी सलाह प्रदान करने के लिए आरएएलयू छोटी, लचीलेपन वाली और विशेषीकृत यूनिटें हैं। यह यूनिट शीघ्र तथा प्रभावी समाधान ढूंढकर उन्‍हें विकसित करती है, फील्‍ड में वास्तविक रूप से कार्य कर रहे व्‍यक्‍तियों से साझा करके प्रसार करती है।

स्‍वच्‍छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्‍यों में से एक उद्देश्‍य ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्‍य जीवन की गुणवत्‍ता में सुधार लाना है। यह उद्देश्‍य तक तक प्राप्‍त नहीं किया जा सकता जब तक गांवों की सामान्‍य स्‍वच्‍छता उचित ढंग से व्‍यवस्‍थित नहीं की जाती है। एसएलडब्‍ल्‍यूएम के प्रभावी प्रबंधन के अंतर्गत, बायोडिग्रेडेबल तथा नॉन-बायोडिग्रेडेबल अपशिष्‍ट का प्रबंधन, गांवों में एकत्र गंदे पानी का प्रबंधन तथा गांवों की साफ-सफाई करना शामिल है।

ठोस और तरल अपशिष्‍ट प्रबंधन(एसएलडब्‍ल्‍यूएम), एसबीएम(जी) का महत्‍वपूर्ण घटक है। इस घटक के अंतर्गत कंपोस्‍ट पिट, वर्मी कंपोस्‍टिंग, बायोगैस प्‍लांट, कम लागत वाली निकास व्‍यवस्‍था, सोकेज चैनल/पिट्स, अपशिष्‍ट जल का पुन: उपयोग तथा घरेलू कूड़े को एकत्र करना, अलग करना और उसका निपटान करना तथा मासिक धर्म संबंधी स्‍वच्‍छता प्रबंधन आदि जैसी गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं।

पंचायती राज संस्‍थानों को कूड़ा इकट्ठा करने व उसका निपटान करने तथा पानी इकट्ठा होने की रोकथाम करने के लिए एक व्‍यवस्‍था अपनाने की जरूरत है। ठोस तथा तरल अपशिष्‍ट प्रबंधन गतिविधियों के लिए 150/300/500 और 500 से ऊपर के परिवारों वाली ग्राम पंचायतों के लिए क्रमश: 7/12/15/20 लाख तक की निधियां उपलबध हैं। केंद्र, राज्‍य/पंचायत/समुदाय के बीच वित्‍त पोषण ढांचा 60:40 (पूर्वोत्‍तर तथा विशिष्‍ट श्रेणी के राज्‍यों के मामले में 90:10) के अनुपात में होगा। इसके अलावा, एसएलडब्‍ल्‍यूएम के लिए मनरेगा के अंतर्गत प्रति ग्राम पंचायत के लिए 5 लाख तक की राशि उपलब्‍ध है। 14वें वित्त आयोग/राज्य निधियां/सीएसआर निधियों आदि के अंतर्गत निधियाँ उपलब्ध हैं।

सूचना, शिक्षा तथा संप्रेषण(आईईसी) स्‍वच्‍छ भारत मिशन(ग्रामीण) का एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण घटक है जो कार्यक्रम के सफल कार्यान्‍वयन का आधार है। लोगों को उचित स्‍वच्‍छता प्रथाओं में उनकी भूमिका, जिम्‍मेदारी तथा उसे अपनाने से प्राप्‍त होने वाले लाभ के विषय में सूचना देने, शिक्षित करने तथा प्रेरित करने के लिए यह एक प्‍लेटफार्म उपलब्ध कराता है। सुरक्षित स्‍वच्‍छता के विभिन्‍न पहलुओं पर व्‍यवहारगत परिवर्तन लाने, प्रभावी मांग सृजन करने, स्‍वास्‍थ्य और व्‍यक्‍तिगत साफ-सफाई के बीच संबंध स्‍थापित करने में आईईसी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्‍वच्‍छता सुविधाओं के लिए मांग सृजन में आईईसी की भूमिका सर्वविदित है। स्‍वच्‍छता कार्यक्रमों की सफलता और स्‍थायित्‍व के लिए सशक्‍त, जागरूक तथा कुशल हिस्‍सेदारों की आवश्‍यकता है जो स्‍वच्‍छता स्‍कीमों की आयोजना, कार्यान्‍वयन, प्रचालन, रख-रखाव तथा प्रबंधन के लिए सक्षम हों। स्‍वच्‍छ भारत मिशन(ग्रामीण) का फोकस सुरक्षित स्‍वच्‍छता और व्‍यक्‍तिगत साफ-सफाई को अपनाकर लोगों में व्‍यवहारगत परिवर्तन लाने पर है। लोगों को शिक्षित करने के लिए कार्यक्रम सामुदायिक भागीदारी पर बल देता है। कुल संसाधनों का 8% तक सूचना, शिक्षा और संप्रेषण (आईईसी) पर व्‍यय किया जा सकता है- इसमें से 5% तक राज्‍य और जिला स्‍तरों पर व्‍यय किया जा सकता है। राज्‍यों को सलाह दी गई है कि वे कम से कम 60% आईईसी निधियों को अंतर वैयक्‍तिक संप्रेषण (आईपीसी) गतिविधियों पर खर्च करें। कई राज्‍य सामुदायिक दृष्‍टिकोण पर बल दे रहे हैं जिसमें वे लोगों को प्रत्‍यक्ष तौर पर प्रेरित कर रहे हैं और कुछ प्रेरक उपकरणों का प्रयोग करके लोगों को स्‍वच्‍छता और व्‍यक्‍तिगत साफ-सफाई के महत्‍व के बारे में अवगत करा रहे हैं। इसके अलावा, लोगों को शिक्षित करने के लिए परंपरागत आईईसी उपकरणों का भी प्रयोग किया जा रहा है। लोगों को शिक्षा देने हेतु कलेक्‍टरों और प्रमुख हिस्‍सेदारों को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। परंपरागत आईईसी दृष्‍टिकोण जैसे पोस्‍टरों, पैम्फ्लेट, दीवार पर चित्रकारी आदि का प्रयोग किया जा सकता है परंतु उनकी अपील और प्रभाव सीमित होता है। प्रभाव सृजन का सबसे अच्‍छा तरीका है- समग्रवादी दृष्‍टिकोण अपनाना, जिससे भागीदारी तथा पद्धतियों द्वारा समुदाय सशक्‍त होता है जिससे स्‍वच्‍छता की स्‍थिति के संबंध में निर्णय लेने के लिए समुदाय सदस्‍यों के मस्‍तिष्‍क प्रेरित होते हैं। मास मीडिया व्‍यवहारगत परिवर्तन संप्रेषण (बीसीसी) पहलों से समुदाय स्‍तर पर संप्रेषण को बढ़ाया जा सकता है जो खुले में शौच और स्‍वच्‍छ वातावरण बनाए रखने से संबंधित सामाजिक और सांस्‍कृतिक मानदंडों में परिवर्तन लाने पर बल देता है जिससे न सिर्फ व्‍यवहारों में परिवर्तन होगा परंतु अधिक महत्‍वपूर्ण रूप से व्‍यवहारगत परिवर्तन को स्‍थायी बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

मंत्रालय ने ग्रामीण लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने, स्‍वच्‍छता सुविधाओं के मांग सृजन करने और स्‍वच्‍छ वातावरण के निर्माण के लिए बीसीसी गतिविधियों के कार्यान्‍वयन राज्‍यों के लिए एक व्‍यापक ढांचा उपलब्‍ध कराने हेतु स्‍वच्‍छता साफ-सफाई और संप्रेषण कार्यनीति (एसएचएसीएस) तैयार की है। एसएचएसीएस का फोकस अंतर-वैयक्‍तिक (आईपीसी) पर है जिस पर आईईसी का 60% खर्च किया जाना प्रस्‍तावित है।

9000 करोड़ रुपए की परियोजना लागत सहित स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए विश्व बैंक सहायता परियोजना को 23.03.2016 को अनुमोदन प्राप्त हुआ है। परियोजना में मुख्यत: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में राज्यों के कार्य निष्पादन के आधार पर राज्यों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। राज्यों के कार्य निष्पादन को संवितरण से जुड़े सूचकांकों (डीएलआई) नामक कुछ कार्य निष्पादन सूचकांकों के मापन के आधार पर एक स्वतंत्र सर्वेक्षण द्वारा आंका जाएगा। डीएलआई निम्नलिखित हैं :-

  • खुले में शौच करने में कमी
  • गावों में खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति का स्थायित्व।
  • बेहतर ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) से सेवित ग्रामीण आबादी के प्रतिशत में वृद्धि।

परियोजना के उद्देश्‍य हैं :-

  • ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच को कम करना।
  • खुले में शौच मुक्‍त गांव।
  • बेहतर ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन।
  • पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय की क्षमता को बढ़ाना।

एक प्रोत्‍साहन ढांचे के माध्‍यम से परियोजना द्वारा एसबीएम (जी) की प्रभावोत्‍पादकता में सुधार होगा जिससे राज्‍य, एसबीएम (जी) के इच्‍छित परिणामों तथा निष्‍कर्षों जैसे खुले में शौच में कमी, खुले में शौच मुक्‍त गांवों (ओडीएफ) के स्‍थायित्‍व की प्राप्‍ति तथा बेहतर ठोस एवं तरल अपशिष्‍ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्‍ल्‍यूएम) की प्राप्‍ति के लिए राज्यों के प्रयासों का पुन: विन्‍यास होगा। इस परियोजना से अन्‍य बातों के साथ-साथ व्‍यवहारगत परिवर्तन संवाद को सशक्‍त बनाने, क्षमता संवर्धन तथा कार्यक्रम प्रबंधन की दृष्‍टि से पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय, राज्‍यों, जिलों तथा जमीनी स्‍तर पर कार्यान्‍वयन क्षमता सशक्‍त होगी।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का चरण I

पूर्व में चलाए जा रहे निर्मल भारत अभियान (एनबीए) में संशोधन करते हुए दिनांक 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरूआत की गई, यह एक समुदाय-चालित तथा जन-उन्मुखी कार्यक्रम हैं जिसका उद्देश्य सर्वव्यापी सुरक्षित स्वच्छता से है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित केवल स्वच्छता कार्यक्रम है।

सरकार ने भारत में वर्ष 2019 तक हर जगह स्वच्छता लाने, स्वच्छता की स्थिति में सुधार करने और देश में खुले में शौच करने की प्रथा को समाप्त करने के प्रयासों में वृद्धि लाने के लिए 02 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) शुरू किया। यह कार्यक्रम देश में स्वच्छता और साफ-सफाई में सुधार लाने का सबसे बड़ा अभियान माना जाता है। इस कार्यक्रम की सफलता शौचालयों की मांग सृजित करने पर निर्भर करती है, जिसके परिणामस्वररूप उनका निर्माण और सभी पारिवारिक सदस्यों द्वारा उनका स्थायी रूप से उपयोग संभव हो सके। इसका लक्ष्य आबादी के मध्य बेहतर वैयक्तिक साफ-सफाई के व्यवहार को बढ़ावा देना और देश के गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्यूएम) परियोजनाओं को शुरू करके सफाई में सुधार लाना भी है। इस कार्यक्रम में प्रशिक्षित कार्मिकों की सेवाएँ लेकर, वित्तीय प्रोत्साहन देकर और आयोजना एवं मॉनीटरिंग के लिए सिस्टम और प्रक्रियाएँ बनाकर सहयोग देकर बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत व्यवहारगत परिवर्तन के कार्यों पर जोर देना है, जिसमें अंतरवैयक्तिक संप्रेषण, कार्यान्वयन और सेवा प्रणाली को ग्राम पंचायत स्तर तक सशक्त बनाना और राज्यों को उनकी स्थानीय संस्कृतियों, प्रथाओं, संवेदनाओं और मांगों के आधार पर सुविधा तंत्र को डिजाइन करने में लचीलापन देना शामिल है।

  • निर्मल भारत अभियान (एनबीए) को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में पुनः निर्मित किया गया।
  • आईएचएचएल की इकाई लागत को 10,000/- रूपये से बढ़ाकर 12,000/- रु. किया गया, ताकि जल की उपलब्धता, भंडारण, हाथ-प्रक्षालन तथा शौचालयों की सफाई आदि के लिए जल उपलब्ध हो।
  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से आईएचएचएल के लिए केंद्रीय हिस्सा‍ 72,00/- (60%) होगा। राज्य का हिस्सा 4800/- रुपये (40%) होगा। पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर तथा विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों के लिए केन्द्रीय हिस्सा 10,800/- है तथा राज्य का हिस्सा 12,00/- रुपये है (90% : 10%)। अन्य स्रोतों से अतिरिक्त अंशदान स्वीकृत किया जाएगा।
  • कुल परियोजनागत लागत का 8% आईईसी के प्रावधान के लिए होगा जिसका 3% केन्द्रीय स्तर पर तथा 5% राज्य स्तर पर उपयोग किया जाएगा।
  • प्रशासनिक लागत के प्रावधान के लिए परियोजना लागत का 2% उपलब्ध होगा। केंद्र तथा राज्य के बीच हिस्सेदारी का ढांचा 60 : 40 का होगा।
  • वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों (आईएचएचएल) के निर्माण के लिए प्रोत्साहन के भुगतान के लिए मनरेगा से आंशिक वित्तपोषण बंद कर दिया गया है तथा भारत सरकार के हिस्से की संपूर्ण राशि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से दी जाती है।
  • एसएलडब्ल्यूएम का वित्तपोषण 60 : 40 के अंशदान के ढाँचे में होगा। सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (सीएससी) के अंशदान के लिए यह 60:30:10 होगा (केंद्र : राज्य : समुदाय)। सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण तभी होगा जब ग्राम पंचायत उसके स्वामित्व की जिम्मेदारी ले और सतत् प्रचालन एवं रखरखाव की प्रणाली सुनिश्चित करे।
  • सभी स्कूली शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को तथा आंगनवाड़ी शौचालयों के निर्माण की जिम्मेदारी महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्रालय को अंतरित की गई है।
  • निगरानी तंत्र को मजबूत बनाया जाएगा। परिणामों (निर्माण) तथा निष्कर्षों (उपयोग) की निगरानी की जाएगी।
  • स्व्च्छ भारत मिशन द्वारा शौचालयों तथा एसएलडब्यूएम की परियोजनाओं के लिए प्रामाणिक तकनीकी विकल्पों की सूची राज्यों को उपलब्ध कराई जाएगी। मिशन, न्यूनतम स्वीकृति योग्य तकनीकों की सूची उपलब्ध कराएगा जिनके लिए इस कार्यक्रम के अंतर्गत सहायता उपलब्ध होगी। तथापि लाभार्थी द्वारा अतिरिक्त लागत का वहन किए जाने पर ही उच्च प्रौद्योगिकी के उपयोग की स्वीकृति होगी।

एसबीएम (जी) के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की सामान्य गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए स्वच्छता, व्यक्तिगत साफ-सफाई तथा खुले में शौच को बन्द करने को प्रोत्साहन देना
  • आईएचएचएल की इकाई लागत को 10,000/- रूपये से बढ़ाकर 12,000/- रु. किया गया, ताकि जल की उपलब्धता, भंडारण, हाथ-प्रक्षालन तथा शौचालयों की सफाई आदि के लिए जल उपलब्ध हो।
  • स्वच्छ भारत की संकल्पना को दिनांक 2 अक्टूबर 2019 तक प्राप्त करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के कवरेज को बढ़ाना।
  • जागरूकता पैदा करके तथा स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा के माध्यम से समुदायों तथा पंचायती राज संस्थाओं को सतत् स्वच्छता बनाए रखने तथा सुविधाओं के प्रयोग के लिए प्रेरित करना।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा तथा निरंतर स्वच्छता के लिए प्रभावपूर्ण लागत तथा उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
  • समुदाय द्वारा प्रबंधित स्वच्छता प्रणालियों का विकास करना, जहाँ भी आवश्यक हो, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण स्वच्छता के लिए वैज्ञानिक ठोस एवं तरल अपशिष्ट, पदार्थ प्रबंधन पर बल दिया जाए।

मुख्य गतिविधियां हैं :

  • वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों (आईएचएचएल) का निर्माण।
  • सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (सीएससी) का निर्माण।
  • ठोस तथा अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन (एसएलडब्यूएम) की गतिविधियाँ।
  • सूचना, शिक्षा तथा संप्रेषण (आईईसी) तथा मानव संसाधन विकास (एचआरडी) की गतिविधियां।
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