स्वच्छता सब का कार्य

स्वच्छ आयकॉनिक (प्रतिष्ठित) स्थल

  • भारत सरकार ने अपने स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से, एक बहु-हितधारक पहल प्रस्तावित किया है जिसमें देश भर के 100 स्थानों की सफाई पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो उपने इतिहास, विरासत और धार्मिक और / या सांस्कृतिक महत्व के कारण आयकॉनिक "प्रतिष्ठित" हैं और जहां हज़ारों आगंतुक आते हैं। इस पहल का उद्देश्य इन स्थानों पर विशेष रूप से इनकी परिधि के भीतर और आस-पास के क्षेत्रों में एक उच्च स्तर की स्वच्छता प्राप्त करना है। इस कार्य की अधिकता को देखते हुए, इसकी सफलता सभी सरकारी और निजी क्षेत्र के स्तरों पर केंद्रीय, राज्य और स्थानीय हितधारकों के सक्रिय सहयोग पर आश्रित है। इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा भागीदार मंत्रालयों - आवासन और शहरी विकास मंत्रालय, पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के समन्वय और साथ ही साथ राज्य और नगर निगमों तथा चयनित स्थलों के न्यासों और समितियों के सहयोग से पहल का समन्वय किया जा रहा है। विश्व बैंक ने चयनित आयकॉनिक स्थलों को कार्य योजना तैयार करने में सहायता प्रदान की है।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, केंद्रों के न्यासों / प्रबंधन, प्रायोजक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और विश्व बैंक समर्थित अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल करते हुए प्रारंभिक परामर्श किया। इन परामर्शों के आधार पर, कार्य योजनाओं को 3 महीने, 6 महीने, 9 महीने और 12 महीने के कार्यान्वयन कार्यक्रम के साथ अंतिम रूप दिया गया। कार्य योजनाओं में पहले से चल रहे कार्यक्रमों अर्थात् अमृत(एएमआरयूटी), हृदय (एचआरआईडीएआई), प्रसाद (पीआरएएसएडी) आदि से निधियां प्राप्त करना शामिल है। पीएसयू अपने अपनाए गए प्रत्येक स्थल के लिए आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त वित्तीय सहायता देते हैं।

अब तक निम्नलिखित आयकॉनिक स्थलों पर कार्य किया गया है:

क्र.सं. आयकॉनिक स्थल राज्य
चरण-I
1 अजमेर शरीफ दरगाह, अजमेर राजस्थान
2 छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी), मुंबई महाराष्ट्र
3 श्री माता वैष्णो देवी, कटरा जम्मू और कश्मीर
4 स्वर्ण मंदिर, अमृतसर पंजाब
5 कामाख्या देवी श्राइन, गुवाहाटी असम
6 मणिकर्णिकाघाट, वाराणसी उत्तर प्रदेश
7 मीनाक्षी मंदिर, मदुरै तमिलनाडु
8 ताज महल, आगरा उत्तर प्रदेश
9 तिरुमाला तिरुपतिदेवस्थानम, तिरुपति आंध्र प्रदेश
10 श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी ओडिशा
चरण-II
1 गंगोत्री उत्तराखंड
2 यमुनोत्री उत्तराखंड
3 चारमीनार, हैदराबाद तेलंगाना
4 सोमनाथ मंदिर, गिर सोमनाथ गुजरात
5 कलादी (शंकराचार्य के जन्मस्थान), एर्नाकुलम केरल
6 महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन मध्य प्रदेश
7 बैद्यनाथ धाम, देवघर झारखंड
8 गया तीर्थ, गया बिहार
9 कॉनवेंट और चर्च ऑफ सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी, गोवा गोवा
10 गोमतेश्वर मंदिर, श्रवणबेलगोला कर्नाटक
चरण- III
1 श्री राघवेंद्र स्वामी मठ मंत्रालयम, कुरनूल आंध्र प्रदेश
2 हज़ारदुआरी पैलेस, मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल
3 श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर, कुरुक्षेत्र हरियाणा
4 विदुरकुटी मंदिर, बिजनौर उत्तर प्रदेश
5 मना गाँव, चमोली उत्तराखंड
6 पैंगोंग त्सो, लद्दाख लद्दाख
7 श्री नाग वासुकी मंदिर, प्रयागराज उत्तर प्रदेश
8 एमाकेथल, इंफाल मणिपुर
9 श्री धर्म संस्थान मंदिर, पठानमथिट्टा केरल
10 कण्वाश्रम, पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड

नमामि गंगे

    • नमामि गंगे कार्यक्रम जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग (डीओडब्ल्यूआर, आरडी और जीआर), जल शक्ति मंत्रालय द्वारा समन्वित एक व्यापक कार्यक्रम है जिसमें कई मंत्रालयों को शामिल किया गया है। नमामि गंगे के तहत, जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) की ज़िम्मेदारियाँ निम्न हैं:
I.) जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के प्रयासों के साथ तालमेल स्थापित करते हुए गंगा नदी के तट पर खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) ग्राम पंचायतों की स्थापना हेतु पहल शुरू करने को प्राथमिकता देना।.

II.) जहां तक संभव हो , जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के प्रयासों से तालमेल स्थापित करते हुए आदर्श गांवों / गंगा ग्राम के विकास हेतु ठोस और तरल कचरा प्रबंधन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यक्रम चलाना।.
12 अगस्त 2017 को प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में नदी के तट पर 2,510 किलोमीटर तक बसे पांच राज्यों यथा -उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 52 जिलों के 1,662 ग्राम पंचायतों के 4,465 गांवों ने ओडीएफ की घोषणा की। खुले में शौच मुक्त स्थिति की प्राप्ति के बाद अब वहां ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन, वृक्षारोपण और अभिसरण आधारित पूर्ण विकास से संबंधित गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं।
Namami Gange

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मध्यवर्तन

  • 52 जिलों में सामुदायिक विकास और व्यवहार परिवर्तन के लिए कलेक्टरों के प्रशिक्षण के माध्यम से विशेष क्षमता निर्माण करना और वर्चुअल (आभासी) कक्षाओं के माध्यम से संसाधन पूल का निर्माण करना।
  • स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण के तंत्र और स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण की निधियों को प्राथमिकता के आधार पर नमामि गंगे कार्यक्रम के सेवार्थ उपयोग करना।
  • प्रधानमंत्री कार्यालय / मंत्रीमंडल सचिव / पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव और मुख्य सचिवों की सक्रियता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी द्वारा लगातार समीक्षा, समन्वय और सहयोग।
  • माननीय मंत्रीगण के नेतृत्व में जल संसाधन विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बीच निरंतर और सकारात्मक समन्वय।
  • परियोजना कार्यान्वयन के समन्वय और निगरानी के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में एक वरिष्ठ नोडल अधिकारी को नियोजित करना।
  • 20 अगस्त 2016 को इलाहाबाद में नमामि गंगे पर ग्राम पंचायतों का सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • विकास भागीदारों, सीएसआर, सिविल सोसाइटी और युवा संगठनों के समर्थनों को सूचीबद्ध करना।
  • जलजमाव से ग्रस्त क्षेत्रों के लिए उपयुक्त शौचालय तकनीकों का विकास किया गया।
  • गंगा के समीप नहीं बसे गांवों, निर्जन गांवों को नमामि गंगे की सूची से हटाया गया। दियारा गाँवों के लिए सामुदायिक शौचालय की योजना बनाई गई जहाँ वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय टिकाऊ नहीं होते हैं।
  • एनएलएम कार्य और उनके निष्कर्षों को देखने के बाद क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) ने अतिरिक्त सत्यापन पूरा किया।

नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत प्राप्त उपलब्धियों को निम्नलिखित अवसरों की प्रदर्शनियों में साझा किया गया:

  • दिल्ली में 2 अक्टूबर 2017 और 2018 को आयोजित स्वच्छ भारत दिवस।
  • 8 मार्च 2017 और 2018 को अहमदाबाद और लखनऊ में स्वच्छ शक्ति कार्यक्रम।
  • दिल्ली में 10-11 अक्टूबर 2017 को नाना जी देशमुख की जन्म शताब्दी।
  • दिल्ली में विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून 2018) पर स्वच्छ भारत मिशन प्रदर्शनी।

स्वच्छता पखवाड़ा (एसपी)


स्वच्छता पखवाड़ा स्वच्छ भारत मिशन के तहत की गई एक पहल है। इस कार्यक्रम को अप्रैल 2016 में शुरू किया गया था और यह माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 15 दिनों के लिए स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों में सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को शामिल करके स्वच्छता को "सभी का कार्य" बनाने के विज़न से प्रेरित है।
  • स्वच्छता पखवाड़ा मात्र प्रतीक न रहकर अब कई मील आगे बढ़कर वास्तविक प्रभावकारी गतिविधियों में बदल गया है। मंत्रालय और विभाग अपने पखवाड़ा के दौरान सतत् गतिविधियों के माध्यम से एक सार्थक योगदान दे रहे हैं। यह स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने हेतु एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा है।
  • पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस), जल शक्ति मंत्रालय, एक वार्षिक कैलेंडर (जनवरी से दिसम्बर) तैयार करने के लिए सभी मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय कर रहा है और सभी मंत्रालयों और विभाग के बीच उसका पूर्व-प्रसार कर रहा है।
  • आम तौर पर 5-6 मंत्रालयों को स्वच्छता में सुधार लाने के लिए देशव्यापी पहलें चलाने के लिए साल में 15 दिन दिए जाते हैं। मंत्रालय और विभाग पखवाड़ा की अपनी कार्य योजना प्रस्तुत करते हैं जिसकी निगरानी ऑनलाइन प्रणाली द्वारा की जाती है जहां मंत्रालय उनके स्वच्छता पखवाड़ा की अपनी रिपोर्ट, तस्वीरें, ऑडियो और वीडियो सामग्री अद्यतन करते हैं।
Swachhta Pakhwada

( https://swachhbharatmission.gov.in/SwachhSamiksha/index.aspx ) । हर महीने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग सभी रिपोर्टों को संकलित करता है, एक मासिक रिपोर्ट तैयार करता है और ई-समाचारपत्र के रूप में सभी सरकारी और एनआईसी ईमेल आईडी पर प्रसारित करता है।


स्वच्छता पखवाड़ा समाचारपत्र -
https://swachhbharatmission.gov.in/SwachhSamiksha/index.aspx


स्वच्छता पखवाड़ा कैलेंडर 2020 -
https://swachhbharatmission.gov.in/SwachhSamiksha/index.aspx

स्वच्छ स्वस्थ सर्वत्र (एसएसएस)

  • यह पेयजल और स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) की एक संयुक्त पहल है।
  • उद्देश्य : दो पूरक कार्यक्रमों यथा- स्वच्छ भारत मिशन और कायाकल्प (एमओएचएफडब्ल्यू ) की उपलब्धियों को बढ़ाना और उनका लाभ पहुँचाना।
  • इस पहल में चयनित अस्पतालों में वाश मापदंडों पर ध्यान केंद्रित करना, चिन्हित स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास के क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर ओडीएफ संबंधी कार्रवाई करना और डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को उन्नत स्वच्छता पर प्रशिक्षण देना शामिल हैं।
  • पेयजल और स्वच्छता विभाग ने उन ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया है जहाँ ये प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित हैं ताकि प्राथमिकताओं के आधार पर वहां ओडीएफ स्थिति स्थापित की जा सके।
  • यूनिसेफ द्वारा कायाकल्प पुरस्कार विजेता सीएचसी / पीएचसी के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को वॉश मापदंडों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

पेट्रोल पंपों पर स्वच्छ्ता

  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने swachhta @ PetrolPump नामक एक मोबाइल ऐप विकसित किया है।
  • यह ऐप उपयोगकर्ताओं को पेट्रोल पंपों पर शौचालयों की स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया देने की सुविधा उपलब्ध कराती है। देश भर के 50 हजार से अधिक पेट्रोल पंपों पर यह सुविधा मौजूद है।
  • इससे शौचालयों की स्वच्छता की निगरानी और रखरखाव में मदद मिलेगी और इसे किसी भी ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।
Swachhta at petrol pumps

स्वच्छ भारत कोष (एसबीके)

  • एसबीकेटी एक ट्रस्ट है, जिसकी अध्यक्षता व्यय विभाग के सचिव करते हैं। शासी परिषद के अन्य सदस्य अपनी पदेन क्षमता के साथ इसके न्यासी होंगे। ट्रस्ट का सचिवालय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में स्थापित किया गया है।
  • शासी परिषद के सदस्य जो अपनी पदेन क्षमता में एसबीकेटी के न्यासी होंगे वे निम्नानुसार हैं:
    1. सचिव, व्यय (अध्यक्ष)
    2. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नीति आयोग
    3. सचिव, पेयजल और स्वच्छता विभाग
    4. सचिव, शहरी विकास मंत्रालय
    5. सचिव, आवासन और शहरी गरीबी उन्मूलन विभाग
    6. सचिव, पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय
    7. सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय
    8. सचिव, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय।
  • दिनांक 07.04.2015 को एक सेटलर और 8 न्यासियों द्वारा एक ट्रस्ट डीड हस्ताक्षरित किया गया था। न्यासियों के नाम निम्न हैं:
    1. डॉ विवेक जोशी, ओएसडी (पीपीडी), व्यय विभाग, सेटलर के रूप में
    2. श्री रतन पी वटल, सचिव, व्यय (अध्यक्ष)
    3. श्रीमती सिंधुश्री खुल्लर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नीति आयोग
    4. श्रीमती विजयलक्ष्मी जोशी, सचिव, पेयजल और स्वच्छता विभाग
    5. श्री मधुसूदन प्रसाद, सचिव, शहरी विकास मंत्रालय
    6. डॉ नंदिता चटर्जी, सचिव, आवासन और शहरी गरीबी उन्मूलन विभाग
    7. श्री जे. के. महापात्रा, सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय
    8. श्री एस. एम. विजयानंद, सचिव, पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय
    9.सुश्री वृंदासरूप, सचिव, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय।
  • कोष गठित करने का उद्देश्य: कई व्यक्तियों और परोपकारियों ने वर्ष 2019 तक स्वच्छ भारत प्राप्त करने के उद्देश्य के प्रयासों में अपना योगदान देने की रुचि व्यक्त की है। इस उद्देश्य हेतु परोपकारी जनों और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) से निधियां प्राप्त करने में सुविधा हेतु स्वच्छ भारत कोष की स्थापना की गई है।
  • शासी परिषद: स्वच्छ भारत कोष (जिसे आगे कोष कहा गया है) का संचालन व्यय विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक शासी परिषद द्वारा किया जाएगा। सचिव (योजना), सचिव (पेयजल और स्वच्छता विभाग), सचिव (आवासन और शहरी मामले), सचिव (ग्रामीण विकास), सचिव (पंचायती राज) और सचिव (स्कूल शिक्षा और साक्षरता) इसके अन्य स्थायी सदस्य होंगे। पर्यटन, संस्कृति अथवा किसी अन्य विभाग से विभागीय सचिवों को उनके प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के दौरान आमंत्रित किया जाएगा।
  • एसबीकेटी दिशानिर्देशों के अनुसार, निम्नलिखित गतिविधियों के लिए निधियां प्रदान की जा सकती हैं: -
    (i) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों / सामुदायिक शौचालय परिसरों का निर्माण;
    (Ii) दोषपूर्ण वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय और सामुदायिक शौचालय परिसरों का नवीनीकरण;
    (iii) पहले से निर्मित शौचालयों में पानी की सुविधा प्रदान करना;
    (iv) एसएलडब्ल्यूएम गतिविधियों हेतु
    (v) शौचालयों के रखरखाव के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास करना और स्वच्छता संबंधी शिक्षा के साथ इसे जोड़ना।
    (vi) देश में स्वच्छता में सुधार के लिए शासी परिषद द्वारा यथा निर्धारित कोई अन्य गतिविधि।

स्वच्छता कार्य योजना (एसएपी)

  • स्वच्छता कार्य योजना (एसएपी) वर्ष 2019 तक स्वच्छ भारत की प्राप्ति करने के लिए अपनाया गया एक अंतर-मंत्रालयी सहयोगी दृष्टिकोण है। यह बहुआयामी है। यह माननीय प्रधानमंत्रियों के स्वच्छता को सभी का कार्य बनाने के सपने को साकार करता है। उन्होंने निर्देश दिया है कि सभी केंद्रीय मंत्रालय / विभाग उचित बजट प्रावधानों के साथ महत्वपूर्ण तरीके से इस लक्ष्य के लिए काम करें। 1 अप्रैल, 2017 से मंत्रालयों / विभागों का स्वच्छता कार्य योजना (एसएपी) कार्यान्वित होने लगा था।
Namami Gange

पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस), जल शक्ति मंत्रालय, स्वच्छ्ता कार्य योजनाओं के लिए नोडल विभाग है। यह सभी मंत्रालयों / विभागों की स्वच्छता कार्य योजना को तैयार करने और उन्हें समेकित करने हेतु समन्वय करता है। स्वच्छता कार्य योजना ने माननीय प्रधान मंत्री के विज़न के अनुरूप प्रत्येक मंत्रालय / विभाग की जवाबदेह और बजटित स्वच्छता कार्य योजनाओं की दृष्टि से संपूर्ण सरकार के एकजुट होकर कामकाज करने का एक मील का पत्थर बन गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 72 मंत्रालयों और विभागों का स्वच्छता कार्य योजना का बजट 16800 करोड़ रुपए से अधिक है। मंत्रालयों और विभागों ने अपने मौजूदा और नए योजनाओं / कार्यक्रमों में स्वच्छता को एक अभिन्न अंग बना लिया है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने एक नया बजट शीर्ष संख्या "96" बनाया है और अब ज्यादातर मंत्रालय और विभाग इसके तहत ही अपने स्वच्छता कार्य योजना का व्यय करते हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा एक अनुकूलित पोर्टल (www.swachhataactionplan.gov.in) के माध्यम से और कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की समिति द्वारा स्वच्छता कार्य योजना के तहत मंत्रालयों और विभागों की भौतिक और वित्तीय प्रगति की निरंतर निगरानी और समीक्षा की जाती है। https://swachhataactionplan.gov.in/swachta/

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